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चंद लफ्जों में कैसे कह दूं(( दिल की बात स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

Poem on Friendship(( thought by Sneh Premchand))

Poem on Love care concern respect (( thought by Sneh Premchand))

Poem on Dusshera (( thought by Sneh Premchand))

Zubeen Da Singer Composer Musician Instrumentlist Writer Real Hero lovable soul Kind hearted personality(( homage by Sneh Premchand))

**कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए  जुबिन दा हमें** हर बात में छिपी सच्चाई खास नहीं बहुत खास हैं  ये पाठ जिंदगी के,  जो हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे,बात ये सबके समझ में आई *स्नेह सम्मान* दो हर धर्म जाति को, हर अमीर  गरीब को, हर वर्ग से उन्होंने प्रीत बढ़ाई  एक फरिश्ता एक मसीहा अगणित दिलों में अपनी जगह बनाई कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा हमें,हर बात में छिपी सच्चाई आपने कितना क्या कब कैसे कमाया ये आपका बैंक बैलेंस नहीं अंतिम यात्रा पर हुई इकट्ठी भीड़ बताती है जीवन की यह कटु सच्चाई किसी को जल्दी किसी को देर से समझ में आती है जुबिन दा के जाने से इकट्ठी हुई भीड़ ने बता दी यह सच्चाई लोगों के दिलों में रहना आता था उनको,यही थी उनकी सच्ची कमाई दिल में रखो ना बात कभी   ना करो किसी पर अविश्वाश अपनी सोच से चलो बढ़ो जीवन में आम से बन जाओगे खास कभी करो ना बाध्य किसी को, दो सबको धरातल यथार्थ का और सपनों का आकाश कितनी बड़ी सोच और उनकी हर बात में कितनी गहराई खास नहीं बहुत खास हैं ये पाठ जिंदगी के,किसी को जल्दी किसी को  देर से पर बात समझ में सबके आई जो पच जाए आसानी से ...

Zubeen Singer Composer Instrumentalist Noble soul Golden heart Loveable Kind (( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

एक नहीं बारह इंस्ट्रूमेंट्स बजाना जिन्हें बखूबी आता था ऐसे थे जुबिन दा जिनका मानवता से सच्चा नाता था मात्र गायक,संगीतज्ञ,लेखक ही नहीं थे वे सच्चे मसीहा जिन्हें औरों के दर्द उधारे लेना आता था काल के कपाल पर चिन्हित हो जाती हैं कुछ घटनाएं ऐसी, यूं हीं तो नहीं सबके दिलों पर दस्तक से कर वह नगमे गाता था कला बहुत लोगों की अच्छी होती है पर कला संगीत संग दिल भी उन्हें बहुत अच्छा बनाना आता था आत्मिक लगाव ही तो है जो आज हर आंख नम है उन्हें तो परायों को भी अपना बनाना बड़ा भाता था मात्र असम का दिल असम की धड़कन ही नहीं थे वे, ऐसे कलाकार का तो पूरे विश्व से नाता था

Poem On Shri Ram -Vijay Dashmi Occasion/ Happy Dussehra (( thought by Sneh Premchand))

मन में ही रावण मन में ही राम आज अभी इसी पल से जप लो जाने कब आ जाए जीवन की शाम लग जाती है जब लागी राम की नहीं आता रास फिर और कोई नाम शरणागत की रक्षा करते बजरंगी चित में दिखते श्री राम शबरी की श्रद्धा में राम अहिल्या के इंतजार में राम जटायु के त्याग में राम केवट के भावों में राम विभीषण के विचारों में राम भाइयों के संस्कारों में राम मात पिता के दिल में राम जन जन की आस्था में राम कहां नहीं हैं राम???? राम नजर आते हैं  हर आकृति आकार में राम बस जाते हैं जिस चित में फिर रहते उसकी सोच विचार में