**कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा हमें** हर बात में छिपी सच्चाई खास नहीं बहुत खास हैं ये पाठ जिंदगी के, जो हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे,बात ये सबके समझ में आई *स्नेह सम्मान* दो हर धर्म जाति को, हर अमीर गरीब को, हर वर्ग से उन्होंने प्रीत बढ़ाई एक फरिश्ता एक मसीहा अगणित दिलों में अपनी जगह बनाई कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा हमें,हर बात में छिपी सच्चाई आपने कितना क्या कब कैसे कमाया ये आपका बैंक बैलेंस नहीं अंतिम यात्रा पर हुई इकट्ठी भीड़ बताती है जीवन की यह कटु सच्चाई किसी को जल्दी किसी को देर से समझ में आती है जुबिन दा के जाने से इकट्ठी हुई भीड़ ने बता दी यह सच्चाई लोगों के दिलों में रहना आता था उनको,यही थी उनकी सच्ची कमाई दिल में रखो ना बात कभी ना करो किसी पर अविश्वाश अपनी सोच से चलो बढ़ो जीवन में आम से बन जाओगे खास कभी करो ना बाध्य किसी को, दो सबको धरातल यथार्थ का और सपनों का आकाश कितनी बड़ी सोच और उनकी हर बात में कितनी गहराई खास नहीं बहुत खास हैं ये पाठ जिंदगी के,किसी को जल्दी किसी को देर से पर बात समझ में सबके आई जो पच जाए आसानी से ...