Zubeen Da Singer Composer Musician Instrumentlist Writer Real Hero lovable soul Kind hearted personality(( homage by Sneh Premchand))
**कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए
जुबिन दा हमें**
हर बात में छिपी सच्चाई
खास नहीं बहुत खास हैं
ये पाठ जिंदगी के,
जो हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे,बात ये सबके समझ में
आई
*स्नेह सम्मान* दो हर धर्म जाति को, हर अमीर गरीब को, हर वर्ग से उन्होंने प्रीत बढ़ाई
एक फरिश्ता एक मसीहा अगणित दिलों में अपनी जगह बनाई
कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा हमें,हर बात में छिपी सच्चाई
आपने कितना क्या कब कैसे कमाया ये आपका बैंक बैलेंस नहीं
अंतिम यात्रा पर हुई इकट्ठी भीड़ बताती है
जीवन की यह कटु सच्चाई
किसी को जल्दी किसी को देर से समझ में आती है
जुबिन दा के जाने से इकट्ठी हुई भीड़ ने बता दी यह सच्चाई
लोगों के दिलों में रहना आता था उनको,यही थी उनकी सच्ची कमाई
दिल में रखो ना बात कभी
ना करो किसी पर अविश्वाश
अपनी सोच से चलो बढ़ो जीवन में
आम से बन जाओगे खास
कभी करो ना बाध्य किसी को,
दो सबको धरातल यथार्थ का और सपनों का आकाश
कितनी बड़ी सोच और उनकी हर बात में कितनी गहराई
खास नहीं बहुत खास हैं ये पाठ जिंदगी के,किसी को जल्दी किसी को देर से पर बात समझ में सबके आई
जो पच जाए आसानी से
खाओ सदा वही आहार
प्रकृति से सीखो करना प्रेम तुम
बहुत ही गहन उनका विचार
हर बात में अर्थ है गहरा,
जैसे जिंदगी ने उन्हें बात हो समझाई
कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा,हर बात में छिपी सच्चाई
मां,मातृभूमि,मातृभाषा और अपनी संस्कृति से सीखो करना प्यार
जुड़े रहेंगे गर हम अपनी मिट्टी से,
खुद ही सीख जाएंगे संस्कार
दूसरों की भाषा और संस्कृति का भी करो सम्मान सदा,
जिम्मेदारी संग ही मिलते हैं अधिकार
भाषा,साहित्य और संस्कृति के बारे में सदा दिल से रखो अपने विचार
हर वर्ग हर स्तर और हर उम्र के लोगों के बीच रहो सदा,
हो जाएगा सुंदर तुम्हारा संसार
खुद को उनके बीच का हिस्सा करवाओ महसूस सदा,
जुड़ाव जीवन का सच्चा श्रृंगार
कर्म ही परिचय पत्र होते हैं असली व्यक्ति का,
वरना एक ही नाम के व्यक्ति होते हैं हजार
कर्म की वीणा आजीवन बड़े प्रेम से उन्होंने बजाई
कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए जुबिन दा,हर बात में छिपी उनके सच्चाई
ओछी और गंदी राजनीति से रहो दूर सदा,करो दिल से लोगों के लिए तुम काम
क्रेडिट की सोचे बिना,कर्म करो तुम सदा निष्काम
निज जीवन में अपने आचरण से समझा गए वे गीता ज्ञान
आंख बंद कर ना विश्वाश करो किसी पर अंध विश्वासों को भी ना दो जीवन में स्थान
धार्मिक कर्मकांडो और झूठे गुरु से भी दूर रहो सदा,यही सोच में था उनकी भाव प्रधान
जाति का भेद भाव न कभी करो तुम,मुक्त रहो हर बंधन से, आनंदित जीवन आए तुम्हें जीना
यही है तीर्थ यही है धाम
ना मेरी कोई जाति है ना मेरा कोई धर्म है, मानव सेवा ही सच में करती कल्याण
उच्चारण नहीं आचरण में जुबिन दा ने सारी की सारी बातें निभाई
कुछ नहीं बहुत कुछ सिखा गए हमें जुबिन दा,हर बात में छिपी सच्चाई
मदद और रक्षा करो सदा औरतों,बच्चों,वृद्धजनों,असहाय जनों और विकलांग लोगों की
जुबिन दा ने सच में यह बात निभाई
शक ना करो कभी दोस्ती पर
हर छोटे बड़े से जुबिन ने दोस्ती निभाई
अपने वफादार की सदा करो रक्षा
अपनी जिंदगी औरों के लिए जीने वाले जुबिन दा ने कथनी को करनी की राह दिखाई
अपनी history और heritage में कभी उपेक्षा ना करना छोटी छोटी बातों की भी,हमारा इतिहास हमारे अतीत की परछाई
सबसे बड़ी बात जुबिन दा के जीवन चक्र को देख मुझे तो यही समझ में आई
कुछ अलग करना अलग ही ढंग से करना सीखो तुम
भिन्नता ने सदा ही हमारी कीमत बढ़ाई
The best देने की करो यथा संभव कोशिश,
देखना संकल्प ने सिद्धि से होगी आंख मिलाई
Formal education से महत्वपूर्ण हैं पाठ जिंदगी के,हो बेहतर गर जिंदगी हो अनुभवों की पाठशाला बनाई
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
12 वाद्य यंत्र बजाने आते थे जुबिन दा को, हर सुर को बेहतरीन सरगम दे अपनी वाणी अमृत बनाई
हर संभावित सम्भावना को देखा,जाना,पहचाना,किया मंथन,आत्म सुधार और फिर आत्म सुधार की अखण्ड लौ जलाई
मात्र गायक ,संगीतज्ञ,लेखक ही नहीं बने अपने लोगों की आवाज
Cultural Icon कहें या कहें legend दिलों को जोड़ने का बजा गए वे साज
कम बोलो स्पष्ट बोलो गहरा बोलो और जो भी कहो उसे कर के दिखाओ
मत चिंता करो किसी की सोच कर,
मन के गलियारों में विचरण करते जाओ
अंदर बाहर एक जैसा रूप रखो तुम,pretend karne का ना ढोंग
रचा ओ
मत दौड़ो कभी किसी और के पीछे
अपने हुनर से अपने वजूद को सागर में जलजात सा तुम खिलाओ
आते हैं उतार चढ़ाव जीवन में
सुख दुख,धूप छाया,खुशी ग़म
सबको सहज भाव से अपनाओ
हर बात में लगता है छिपी है उनके सच्चाई
जुबिन दा की असमय मौत से
फिजा पूरी ही उदास सी हो आई
*उम्र छोटी पर कर्म बड़े*जिंदगी लंबी भले ही न हो पर बड़ी हो,
करुणा ने प्रेम से कर ली थी सगाई
उनके जाने से हुई
हानि धरा की लाभ गगन का
मुझे तो बात यही समझ में आई
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं
करुणा से बड़ा कोई भाव नहीं
जुबिन दा की यही थी सच्ची कमाई
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