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Showing posts from July, 2025

यही चाहते हैं रसखान

क्या चाहते हैं रसखान? लाठी,कम्बल गर मिल जाये मोहन की, तीनों लोकों का त्याग देंगे राज। मिल जाएं जो नंद बाबा की गइयाँ चरावन को, आठ सिद्धियों और नौ निधियों का क्या काज। मिल जाएं जो ब्रज के वन,बगीचे और तड़ाग करोड़ों सोने के महल न्योछावर, करील के कुंजों  देखने के लिए मन रसखान का रहा भाग।।

आई तीज बो गई बीज

आई तीज बो गई बीज, आई होली भर ले गई झोली आती है यादें अतीत की बहुत आती है याद वो मां की मीठी बोली आज भी जेहन में छाई हुई हैं माँ की वे गहरी गहरी बातें, वो मां का कर्मों में आनंद लेना हर त्योहार में छिपी सौगातें। नीम के पेड़ पे झूला पड़ा, तेज़ पींगो से मन बहला। खुशहाली गूँजें आँगन में, पड़ोसिनें भी आ जाएँ आनन-फानन में। माँ के हाथों की सुहाली, पापड़ की खुशबू, सजता था घर जैसे कोई पर्व हो रू-ब-रू। थाली में स्वाद, मन में उमंग, हर दिन जैसे कोई नया रंग। न धन था बहुत, न वैभव भारी, फिर भी ना थी कोई कमी हमारी। स्नेह था, अपनापन था, हर दिल में तीज सा बचपन था। अब जब आई फिर से तीज की बारी, याद आई वो नीम की डारी। माँ की बातें, त्योहारों की रीत, मन में बस गईं बनकर प्रीत। सहेज ली हैं वो सब यादें, आज की भागती दुनिया में जैसे कुछ प्यादे। हर तीज पे फिर वो पल बुलाएँ, बचपन की गलियों में झूला झुलाएँ – समर्पित माँ को, तीज की उन मिठास भरी स्मृतियों को

चलो मन

चलो मन वृन्दावन की ओर प्रेम का रस जहाँ छलके है माँ की ममता जहाँ महके है। चिड़ियों से आंगन चहके है। सदभाव जहाँ डाले है डेरा न कुछ तेरा,न कुछ मेरा आती समझ जिसको जहाँ ये ऐसे घाट की ओर। जहाँ जात पात का भेद नही है मज़हब की जहाँ हो न लड़ाई ऐसी वसुंधरा क्यों न बनाई हो जाये मनवा विभोर।

मैं सही तूं गलत

समझ लेना प्रेम करना आ गया

कड़वा है मगर सत्य है

प्रलय

लोग

कड़वा

दर्द को दवा

बंधन

स्नेह

प्रलय

सपने

शफ़क

कड़वा है मगर सत्य है

दो परिवार

विवाह से दो व्यक्ति ही नहीं, जुड़ते हैं दो परिवार।। सौ बात की एक बात है, प्रेम ही इस नाते का आधार।। कुछ कर दरगुजर,कुछ कर दरकिनार। यही मूल मंत्र है सफल वैवाहिक जीवन का, सत्य जाने ये सारा संसार।। एक नहीं,अब है ये बंधन सात जन्म का, हो हर लम्हा आपके जीवन का खुशगवार।। ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार हो प्रेम भरा तेरा संसार लम्हा लम्हा कर बीत गए बरस दो  रहे सौ बरसों तक तूं हीं प्यार

मतभेद

मां ही तीर्थ

काम करके

भाई

शिकवा

प्रलय

विश्वामित्र

शिव कतरा

दोषारोपण

कड़वा है

सेहरा सेहरा

बांवरा मन

बांवरा मन पलक  झपकते ही जाने कहाँ कहाँ चला जाए, मन की गति पवन की गति से भी तेज है,बैरी मनवा इसे समझ न पाए।। सोचा जो भी मन ने,कर्म में बदला, कर्म परिणाम में हुए तबदील, मन को शिक्षित ही नही संस्कारित करना भी है ज़रूरी,संस्कार ही होता मन का वकील।। निषेध के प्रति सदा आकर्षित होता है मन, चाहता है करना सदा मनचाही, मन जब नही सुनता दिमाग की,आ जाती है बड़ी  तबाही।। मन के हारे हार है,मन के जीते जीत आज की नही,युगों युगों से  है ये चलती आयी रीत।। पुरानी यादों के भंवर में अक्सर, बांवरा मन खो जाता है, होता है जो परमप्रिय हमे, वो अक्सर याद आ जाता है।। संवेदना और संस्कार का टीका, मन के मस्तक पर लगाना है बहुत ज़रूरी, बहुधा दबानी पड़ती है इच्छाएँ मन की, वरना रिश्तों में आ जाती है दूरी।। बांवरा मन अक्सर सच का ही देता है साथ, मन की न सुन कर बन जाता है बनावटी सा  इंसा,मन को अक्सर थामना पड़ता है विवेक का हाथ।। सब को पता है, सब समझते हैं,फिर भी भूलभुलैया में मन उलझ उलझ सा जाए, समस्या का जब नही मिलता समाधान, अश्रु नयनों से नीर बहाए।।          स्नेहप्रेमचंद

कच्चे धागे पर पक्का बंधन(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कच्चे धागे के पक्के बंधन का आया राखी का त्योहार स्नेह,ख्याल,परवाह,अपनत्व ही, इस पर्व के मूलाधार   नाराज़ हैं जो भाई बहन बरसों से, मिल कर मनाएं यह पावन त्यौहार क्यों बने हैं चट्टान से,पिघल जाएं मोम से,दुनिया में नहीं आना बार बार हमारी नाराजगियों की उम्र हमारी उम्र से लंबी ना हो, कुछ करना दरगुज़र कुछ करना दरकिनार हर प्रॉपर्टी के झगड़ों से ऊपर है यह नाता भाई का, बस चित में पनपे ना कोई विकार पहले झुकने वाला ही बड़ा होता है सदा, जाना जिसने जाना जिंदगी का सार नहीं झुकने वाले को पछतावा होता है एक रोज,  पर कोई लाभ नहीं होता फिर झूठा लगने लगता है संसार कच्चे धागे के पक्के बंधन का आया राखी का त्योहार स्नेह,ख्याल,परवाह,अपनत्व ही इस पर्व के मूलाधार हर बहना को हर भाई से  प्यार का मिलता रहे उपहार मां के बाद बहन का नाता ही होता है निस्वार्थ प्रेम का, मां सी ममता बहती रहती बहना चित में बेशुमार कुछ लेने नहीं देने आती हैं दुआएं बेटियां  कर लेना दिल से उन्हें स्वीकार हंसते हंसते अपना आधा हिस्सा देने वाली बहनों के रहना सदा शुक्रगुजार कच्चे धागे के पक्के बंधन का आया राखी का त...

जन्मदिन बहुत मुबारक भाई

जन्मदिन पर जन्म देने वाली

जन्मदिन पर जन्म देने वाली याद आ ही जाती है, अपनी जाने कितनी इच्छाएं दबा कर,हमारी हर खुशी को कर पूरा,मुस्कान हमारे लबों पर लाती है, और कोई नही मेरे दोस्तों,वही तो माँ कहलाती है, हमारी कितनी ही कमियों को कर नज़रंदाज़ हमे अपने चित्त में बसाती है, समय बेशक बीता जाए,पर वो याद आ ही जाती है, और अधिक कुछ नही कहना, बस उसके न होने से सहजता जीवन से दामन चुराती है।। ईश्वर का पर्याय है माँ,अपनी जान पर खेल कर हमें जग में लाती है।। जब सब पीछे हट जाते हैं मां आगे बढ़ कर आती है बच्चे जो गुण दोषों दोनों संग मां अपनाती है मुझे तो लगता है मां बनने के बाद मां  मां रूप में ही शेष रह जाती है जो सबसे ज्यादा नजर आनी चाहिए वह मां ही अक्सर नजरअंदाज हो जाती है हर गुस्सा हर आक्रोश निकालते हैं हम मां पर,पर हर हालत में वह पहले जैसी ही हो जाती है कभी कभी तो लगता है मुझे मां क्या जान बुझ कर गूंगी बहरी हो जाती है अपनी प्राथमिकताओं को कभी नहीं रखती प्राथमिक,मुख्य से गौण बन जाती है पर बच्चे ना भूलें अपने कर्तव्य कर्मों को,जाने मां के बाद तो उन्होंने जन्नत की भी ना करी कभी मन्नत, फिर क्यों जिंदगी के एक मोड़ पर मां उपेक्...

राखी के सही मायने

कोथली स्नेह परवाह ख्याल है

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार

प्यारी सी ट्विंकल, रौशनी सी चमकती, जैसे चाँदनी रात में एक तारा दमकती। तू आई तो जीवन में उजास भर गया, हर दिल, हर कोना तुझसे मुस्कुरा गया। गीतांजलि, नाम  खुद में एक मधुर गीत है  जैसे खुदा की कोई प्यारी सी प्रीत है   नीलम की ममता की तू सबसे मीठी बात, तेरे आने से खिला हर रंग, हर सौगात। पिता श्री की उम्मीदों की तू उड़ान है, तेरे ख्वाबों में ही तो उनका जहान है। राहुल जिसकी तू जान से प्यारी बहन, तेरे लिए उसका  दिल हर घड़ी करे स्पंदन। तेरा अभिमान और गर्व, तेरी हर खुशी में उसके स्वप्नों का पर्व। तेरी हँसी में वो सारी दुनिया पा जाता है  तेरे आँसू से पहले खुद भीग जाता है।  शिवांग, जो तेरा सच्चा सहारा है, तेरे संग हर राह को उसने संवारा है। तेरे जीवन की मजबूत डोर, जो हर मोड़ पर बने तेरा सच्चा जोर Mother beyond law  सीमा की गोद का तू सुकून है, तेरी हर मुस्कान में उनके जीवन का सुकून है। जिनकी दुआएं तुझ पर सदा रहें, तेरे जीवन में सुख और समृद्धि बहें। सरु, मेरी बेटी, है तुझसी चंचल बातों में, तेरे हर पहलू को वो समझे पूरे जज्बातों में। जो तुझसे सीखती है जीना, तेरे ज...

प्रेम किसी

हमारा प्यार

मैंने पूछा प्रेम से

दिल के करीब