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Thought on love by sneh premchand

प्रेम लेना नहीं देना जनता है।
 प्रेम एहसासों के अधीन है, मुलाकातों के नहीं।।
 प्रेम के आंधी अहंकार को तो ऐसे बहाकर ले जाती है जैसे बारिश का पानी गंदगी को बहाकर ले जाता है।प्रेम को दिखावा भी नहीं आता,अपने आप ही नजर आ जाता है प्रेम।।
    स्नेह प्रेमचंद

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