अब मुझे लगने लगा है
जिंदगी में बेटी से अजीज
कुछ भी तो नहीं,
मन का हर कोना इस भाव से सजने लगा है
अब मुझे लगने लगा है
जिंदगी लंबी भले ही ना हो
पर बड़ी हो
सफलता मिले चाहे ना मिले,
कर्म तो करना ही है,
मन मेरा सत्य यह कहने लगा है
सही सोच से जैसे कीचड़ में कमल कोई खिलने लगा है
अब मुझे लगने लगा है
सुनने में भले ही अच्छा लगे बेटा हुआ है जीने में बेटी से प्यारा कोई एहसास नहीं,
देख लो चाहे सारी दुनिया,बेटी से अधिक कोई दिल के पास नहीं
अब मुझे लगने लगा है
जिंदगी के एक मोड़ पर तो बेटी मां की भी माँ बन जाती है
मित्र,सलाहकार,सारे ही किरदार बखूबी निभाती है
अब मुझे लगने लगा है
वह शिक्षा मात्र अक्षर ज्ञान है जिसके माथ पर सोहते संस्कार नहीं
वह परिवार भी क्या परिवार है
होता जिसमें प्यार नहीं???
अब मुझे लगने लगा है
हर सपने को पूरा करने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए
प्रयास ही तो हमें खास बनाते हैं
अब मुझे लगने लगा है
हर सफर मंजिल की ओर जाए ज़रूरी तो नहीं,
पर मंजिल की ओर जाता कोई न कोई सफर ही है,
इसलिए सफर करना तो जरूरी है
अब मुझे लगने लगा है
दोस्त अधिक हों ज़रूरी तो नहीं
पर जो भी दोस्त हों उनमें एक खास बात होनी जरूरी है
अब मुझे लगने लगा है
जीते जी मात पिता की परवाह,स्नेह करना,मधुर बोली बोलना और थोड़ा समय देना कितना जरूरी है
अब मुझे लगने लगा है
भाई बहनों में मात पिता का अक्स देखना जरूरी है
अब मुझे लगने लगा है
बच्चों को डांट कर नहीं प्रेम से समझा ना ज़रूरी है
अब मुझे लगने लगा है जिंदगी मंज़िल नहीं सफ़र है
अब मुझे लगने लगा है दया से बढ़ कर कोई अलंकार नहीं
अब मुझे लगने लगा है बेटी कभी पराई होती ही नहीं,बेटी तो धड़कन है
श्वास है शक्ति है स्नेह सम्मान सुरक्षा की अधिकारी है
अब मुझे लगने लगा है
बेटी को कोई दौलत न दो,जागीर न दो बस उसे शिक्षा का मौलिक अधिकार तो दो
क्या आप को भी लगता है?????
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