उनको इस जीवन में सच्चा मित्र बनाता है**
यूं तो मिलते तो बहुत हैं जिंदगी के सफर में लोग,
कुछ भूल जाते हैं,कुछ याद रह जाते हैं पर कुछ लोग जेहन में सदा के लिए अंकित हो जाते हैं
*इस फेरहिस्त में नाम सखी तेरा शीर्ष पर हम पाते हैं*
*सावन भादों* से होते हैं कुछ लोग जिंदगी में,
बेमौसम भी खुल कर बरस जाते हैं
सुकून भरी हरियाली से आच्छादित हो जाता है तन मन,
चित चैन,राहत,खुशी मिल कर जिंदगी की चौखट पर दस्तक दे जाते हैं
इस फेरहिस्त में नाम तेरा सखी शीर्ष पर हम पाते हैं
कुछ लोग जेहन में ऐसे अंकित हो जाते हैं
*जैसे बच्चे घर में घुसते ही मां को
आवाज लगाते हैं*
मां भी दौड़ी आती है एक ही आहट पर,
गोधूलि की बेला पर जैसे भानु धरा से मिलते नजर आते हैं
**इस फेरहिस्त में नाम सखी तेरा शीर्ष पर हम पाते हैं**
कुछ लोग जिंदगी में ऐसे घुल जाते हैं
*जैसे शक्कर घुल जाती है पानी में,
मिठास से संबंध को सींचे जाते हैं*
कुछ लोग हमसे हमारा ही परिचय करवाते हैं
बंध जाते हैं मीठे बंधन में ऐसे
जैसे जलेबी को चाशनी में हम डुबाते हैं
**इस फेरहिस्त में नाम तेरा सखी शीर्ष पर हम पाते हैं**
*कुछ लोग दोस्ती की एक नई परिभाषा सी गढ़ जाते हैं*
कैसे निभाई जाती है दोस्ती
*उच्चारण नहीं आचरण* से हमें सिखाते हैं
इस फेरहिस्त में नाम सखी का
शीर्ष पर हम पाते हैं
**दिल पर दस्तक,जेहन में बसेरा,चित में जिसके पक्के निशान**
कोई और नहीं है वह सखी हमारी
मस्ती,उल्लास का जो पहने परिधान
और परिचय क्या दूं तेरा????
मुझे तो दोस्ती के यही मायने समझ में आते हैं
जहां खुल कर कह सकते हैं हम बात अपनी,
एक बहन को खोया था कभी
पर एक बहन को पा लिया था कभी
विधाता इतनी बड़ी दुनिया में यूं हीं तो नहीं,किसी को किसी से मिलाता है
खून का नहीं दोस्ती तो दिल का दिल से नाता है
कई लोगों की presence होती है ऐसी,
बिखरा बिखरा सा जीवन संवर सा जाता है
इस फेरहिस्त में सखी का नाम शीर्ष पर आता है
ऑफिस से जा रहे हो,दिलों से नहीं
आपसे तो मोहतरमा दिल का नाता है
पदोन्नति पर दिल से लाख लाख बधाई
मेरा बोझिल चित आज यही गुनगुनाता है
बोलने को तो बहुत है मगर अवरुद्ध कंठ में एक गोला सा अटक जाता है
बिछड़े सभी बारी बारी
क्यों मिलन बिछौडे में बदल जाता है
तुम भी जानो हम भी जाने
गुजरा वक्त भला कहां लौट कर आता है??????
दिल की चौखट पर भला हर कोई कहां दस्तक दे पाता है
इस जन्म का नहीं निश्चित ही यह तो कोई पूर्व जन्मों का नाता है
सबसे नहीं होती बात दिल की,
कोई कोई ही चित में बस पाता है
इस फेरहिस्त में नाम सखी का सच में शीर्ष पर आता है
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