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अभी तलक नहीं मिले राम मुझे

अभी तलक नहीं मिले राम मुझे
अभी चित को निर्मल और भी करना होगा

मन के रावण का करके शमन
मन को राम भाव से भरना होगा
अभिनेतालक नहीं मिले राम मुझे
अभी चित को पावन और भी करना होगा

अभी शबरी सी आस्था चित में 
जगानी होगी
भाव के भूखे हैं भगवान
ऐसी सोच बनानी होगी
भीलनी के झूठे बेर भी खुशी से
खा गए थे श्री राम
एक एक बेर को चख चख कर रखा था शबरी ने,जान गए थे यह श्री राम
भेद भाव से ऊपर करना होगा खुद को
फिर मिल जाएंगे तुझ को राम

अभी तलक नहीं मिले राम मुझे
अभी चित को और भी निर्मल करना होगा
अभी भगति भाव नहीं बजरंगी सा
भगति चित में बजरंगी सी जगा नी होगी
जब बहेगी भगति की अविरल धारा
नजर आ जाएंगे सीने में राम
अभी लक्ष्मण भरत सा भ्रातृ प्रेम 
हिया अपने में जगाना होगा
अभी केवट से भाव जिया में अपने लाने होंगे,फिर भाव सागर से पार लगाएंगे श्री राम
अभी जटायु सा बलिदान भी करना होगा,फिर मोक्ष भी दे देंगे श्री राम
सुग्रीव सी मित्रता निभानी होगी
विभीषण सा समर्पण करना होगा
फिर शत्रु पक्ष के होने पर भी अपनी शरण में ले लेंगे श्री राम
जब ऐसा चित हो जाएगा फिर मिल जाएंगे राम मुझे
ऐसा खुद को समझना होगा
अभी तलक नहीं मिले राम मुझे
अभी चित और भी निर्मल करना होगा

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