Skip to main content

Posts

Showing posts with the label आफताब सी

यूं हीं नहीं लिखी जाती किताब(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

कोई जुगुनू नहीं,कोई दीपक नहीं निश्चित ही वह रही होगी *आफताब* यूं हीं तो नहीं लिखी जाती किताब कुछ नहीं,बहुत कुछ खास था उसमें कभी झूठ का नहीं ओढ़ा *नकाब* कितना भी कठिन हो कोई प्रश्न हौले से दे दिया करती *जवाब* *रौनक ए अंजुमन* का सही होगा उसे देना *खिताब* *चितचोर* कहना भी होगा सही उसे,एक अलग ही था उसका *रुआब* कोई इसके जैसा होगा नहीं कभी कोई दूजा,  पूरा लगा कर देख लिया *हिसाब* *उड़ान गगन सी था धरा सा धीरज* नहीं देखा उसे कभी *बेताब* आज भी सोचती हूं  जब उसके बारे में आंखों में आ जाता है*सैलाब* फूलों में से देना हो कोई नाम तो कहूंगी उसको खिला *गुलाब* छोटे से जीवन में जी गई जीवन बड़ा सा,कभी पसंद नहीं थे उसे शराब,शबाब और कबाब भगति धारा बहती थी चित में बड़े वेग से,ऐसी रही उसके जीवन की *किताब* हमारे परिवार का तो एक हीरा थी *नायाब* एक शब्द में करना हो परिभाषित उसे  होगा वह *लाजवाब* जाने इतना प्रेम कहां से लाई  प्रेम सुता सबसे ही करती थी *बेहिसाब* शीतल इतनी जैसे *माहताब*( चांद) धन्य हो गई मेरी लेखनी जो चली तुझ पर ओ*आफताब* मेरा लिखना सार्थक हो आया हो गई जैसे लेखन में *कामयाब* *हानि ...