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मेरी प्यारी बहना अंजु

मेरी प्यारी बहना अंजु…

मेरी प्यारी बहना अंजु!
 तू थी सबसे न्यारी,
भगवान ने बहन बनाकर भेजा, 
पर लगी तू सदा ही बेटी प्यारी

तेरी सूरत, तेरी बातें, 
दिल में घर कर जाती थीं,
मेरी बेटी में भी तेरी ही
 झलक नज़र मुझे आती थी

तू थी जैसे कुदरत का
 एक अनमोल सा तोहफ़ा,
तेरे बिना ये जीवन लगे अधूरा,
जैसे सूना सा कोई रस्ता।

हम सबकी वो छोटी गुड़िया, 
सबकी बड़ी दुलारी थी,
देखते-देखते कब तू दो बेटियों की माँ बन गई,
 ये भी एक कहानी थी
यूं हीं तो नहीं ये भीड़ तेरी इतनी मां जाई दीवानी थी

सुहानी-पावनी में तेरा ही चेहरा मुस्काता है,
कुछ भी करूँ उनके लिए, मन तुझ तक ही जाता है।

तूने हर रिश्ता ऐसे निभाया, जैसे कोई फर्ज़ नहीं—इबादत हो,
बेटी, बहन, माँ, पत्नी… हर रूप में तेरी मोहब्बत हो।

नीलेश की दुनिया थी तू, उसकी हर खुशी का राज,
तेरे बिना उसका दर्द कह पाना, जैसे टूटे हर एक साज़।

हम दुआ करते हैं अब बस, तेरी बेटियाँ मुस्कुराती रहें,
अपने पापा के संग जीवन में हर खुशी पाती रहें।

मेरी अपनी राहों में भी, तू ही मेरा सहारा थी,
हर मुश्किल में लगता था—“अंजु है”, तो उजियारा था।

आज भले ही दूर है तू, इन आँखों की दुनिया से,
पर बसती है हर पल दिल में, मेरी हर एक दुआ में, हर एक सुकून में।

तेरे संग बिताए लम्हे, आज भी जैसे पास खड़े हैं,
तेरी यादों के सहारे ही, ये दिन-रात बड़े हैं।

तू गई नहीं है अंजु, बस रूप बदलकर बैठी है कहीं,
रब के आँगन में आज भी, सबसे प्यारी बेटी वही।

सच कहूँ तो लगता है—
ईश्वर भी तुझसे मिलकर धन्य हो गया होगा,
इतनी पावन आत्मा को पाकर,
उसका भी मन भर आया होगा…

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