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Showing posts from June, 2026

छोड़ो दोहन

जवाब

मां से सुंदर कोई अहसास नहीं

देख लो चाहे सारी दुनिया मां से अधिक कोई खास नहीं मानों चाहे या ना मानो मां से प्यारा कोई एहसास नहीं धरा पर ईश्वर का पर्याय है मां जग के इस घने तमस में मां जैसा प्रकाश नहीं 

अपने

लम्हा लम्हा बीती ज़िंदगानी

अपने तो अपने होते हैं जिंदगी के किसी भी मोड पर  मिल लो उनसे, भाव भीने से संग होते हैं ना कोई गिला करते  ना कोई शिकायत भाव वात्सल्य से  प्रेम सूत्र में पिरोते हैं दिल पर दस्तक दे जाते हैं हम भाव विभोर हो जाते हैं जो चले गए उनका मलाल करने से बेहतर है जो हैं उनके हाल पूछते रहें,समझो हम उन अपनों को श्रद्धांजलि दे रहे होते हैं कई बार हम इतने मसरूफ हो जाते हैं गैरों में,अपने मौन से सब कह रहे होते हैं

बनी रहे जोड़ी

मेरी प्यारी बहना अंजु

मेरी प्यारी बहना अंजु… मेरी प्यारी बहना अंजु!  तू थी सबसे न्यारी, भगवान ने बहन बनाकर भेजा,  पर लगी तू सदा ही बेटी प्यारी तेरी सूरत, तेरी बातें,  दिल में घर कर जाती थीं, मेरी बेटी में भी तेरी ही  झलक नज़र मुझे आती थी तू थी जैसे कुदरत का  एक अनमोल सा तोहफ़ा, तेरे बिना ये जीवन लगे अधूरा, जैसे सूना सा कोई रस्ता। हम सबकी वो छोटी गुड़िया,  सबकी बड़ी दुलारी थी, देखते-देखते कब तू दो बेटियों की माँ बन गई,  ये भी एक कहानी थी यूं हीं तो नहीं ये भीड़ तेरी इतनी मां जाई दीवानी थी सुहानी-पावनी में तेरा ही चेहरा मुस्काता है, कुछ भी करूँ उनके लिए, मन तुझ तक ही जाता है। तूने हर रिश्ता ऐसे निभाया, जैसे कोई फर्ज़ नहीं—इबादत हो, बेटी, बहन, माँ, पत्नी… हर रूप में तेरी मोहब्बत हो। नीलेश की दुनिया थी तू, उसकी हर खुशी का राज, तेरे बिना उसका दर्द कह पाना, जैसे टूटे हर एक साज़। हम दुआ करते हैं अब बस, तेरी बेटियाँ मुस्कुराती रहें, अपने पापा के संग जीवन में हर खुशी पाती रहें। मेरी अपनी राहों में भी, तू ही मेरा सहारा थी, हर मुश्किल में लगता था—“अंजु है”, तो उजियारा था। आ...