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महफिल

सजती है महफिल सदा अपनों के संग में होने से स्नेह सम्मान हो एक दूजे के लिए मन में,आते हैं करीब स्नेह की माला में अपनत्व के मोती पिरोने से

कड़वा है

विस्तार

बहुत छोटी है जिंदगी

जन कल्याण

उम्र

निंदा कभी ना कीजिए