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दौर

हर विषय में अव्वल मां

अंतस्थ की जान लेती है मां

क्या क्या सीखें मां से हम

हर समस्या का समाधान है मां(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मां तो ऐसा विश्वदीप है जिसके आलोक से सम्पूर्ण जगत में फैला है उजियारा ध्यान से देखो ध्यान से सोचों क्या मां से अधिक कोई जग में है प्यारा????

मैने मां में यह सब देखा है(( भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

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