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बड़ी हो गई बुआ

बड़ी हो गई बुआ
फिर भी राखी पर
पीहर आती है
कितने ही संस्कारों की घुट्टी
छोटों को भी पिलाती है
घुटने दुखते हैं उसके
हौले हौले लंगड़ाती है
बड़ी हो गई बुआ
फिर भी राखी पर
पीहर आती है

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