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Showing posts from May, 2025

हो गहन राम की जब अनुभूति(( भगति भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कहां नहीं हैं राम(( भगति भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

यूं हीं तो नहीं मिलते हैं राम(श्रद्धा भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कुछ नहीं बहुत कुछ साथ ले की जाता है एक एल आसियन

अभी तलक नहीं मिले राम मुझे

अभी तलक नहीं मिले राम मुझे अभी चित को निर्मल और भी करना होगा मन के रावण का करके शमन मन को राम भाव से भरना होगा अभिनेतालक नहीं मिले राम मुझे अभी चित को पावन और भी करना होगा अभी शबरी सी आस्था चित में  जगानी होगी भाव के भूखे हैं भगवान ऐसी सोच बनानी होगी भीलनी के झूठे बेर भी खुशी से खा गए थे श्री राम एक एक बेर को चख चख कर रखा था शबरी ने,जान गए थे यह श्री राम भेद भाव से ऊपर करना होगा खुद को फिर मिल जाएंगे तुझ को राम अभी तलक नहीं मिले राम मुझे अभी चित को और भी निर्मल करना होगा अभी भगति भाव नहीं बजरंगी सा भगति चित में बजरंगी सी जगा नी होगी जब बहेगी भगति की अविरल धारा नजर आ जाएंगे सीने में राम अभी लक्ष्मण भरत सा भ्रातृ प्रेम  हिया अपने में जगाना होगा अभी केवट से भाव जिया में अपने लाने होंगे,फिर भाव सागर से पार लगाएंगे श्री राम अभी जटायु सा बलिदान भी करना होगा,फिर मोक्ष भी दे देंगे श्री राम सुग्रीव सी मित्रता निभानी होगी विभीषण सा समर्पण करना होगा फिर शत्रु पक्ष के होने पर भी अपनी शरण में ले लेंगे श्री राम जब ऐसा चित हो जाएगा फिर मिल जाएंगे राम मुझे ऐसा खुद को समझना होगा अभी तलक नहीं म...

अनकही कहानियां

लागी राम नाम की

रंगरेज

सच में ऐसी होती मां

आशियाना

काम पर जा कर

संस्कारों की कोई पाठशाला नहीं होती

स्पर्श प्रेम का

मित्र हमसे छोटे भी हो सकते हैं

क्षण क्षण जी लो इस क्षणिक से जीवन को

सुन सखी पाती मेरे दिल की

कौन कहता है

आस है मां

भाव

नयनों की भी होती है भाषा

घर आंगन

भोर होते ही

शब्द मरहम भी हैं घाव भी हैं

फर्श से अर्श तक

धन्य हो जा लेखनी तूं

बंद हो मुट्ठी तो लाख की

पिता पुत्र

पाठक मंच

प्रेम स्वयंसिद्ध है

हमारा प्यार हिसार(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

प्रेम ही जीवन का आधार

प्रेम है जीवन का आधार, माँ सावित्री की कृपा हो सब पर,बहे सर्वत्र प्रेम की गंगधार।। स्नेहसुमन हम कर रहे अर्पित,इन्हें कर लेना स्वीकार।। आरुषि के आने से ज्यूँ उजला हो जाता है संसार, एक अभिनव पहल करें हम सारे,लें लोगों के दर्द उधार।। यही राज है हर चारु चितवन का,करे इंदु की शीतलता तन मन का परिष्कार।। कोई परी आए उतर मेघों से पूरे जोश से,कर दे मन से दूर समस्त विकार।।

पाठक मंच((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

कोशिश

कोशिश है मेरी  माँ बाप के विषय में लिख कर एक सामाजिक चेतना लाने की कोशिश है मेरी। जो चले गए उन्हें शत शत नमन, और भावभीनी श्रद्धांजलि है मेरी,पर जो इस जहाँ में हैं,उन्हें सम्मान ,तवज्जो,प्रेम,और मीठे बोल दिलवाने की छोटी सी कोशिश है मेरी। वो जो नही जानते कि वे क्या नही जानते,उन्हें कुछ जन वाने की कोशिश है मेरी। सब जानते हैं,सब मानते हैं,बस हनुमान की तरह याद दिलाने की छोटी सी कोशिश है मेरी। सबसे अमीर है वो ,जो माँ बाप के संग में रहता है,उस अमीर को उसके ख़ज़ाने को पहचान करवाने की छोटी सी कोशिश है मेरी। माँ बाप के संग बिताये गए पल अनमोल होते हैं,उन अनमोल पलों को हर कोई सहेजे,बस ये छोटी सी कोशिश है मेरी। हर कोई श्रवण कुमार नही बन सकता, पर इस सोच का अंकुर पल्लवित करने की छोटी सी कोशिश है मेरी। बाद में मन मे न रह जाये मलाल कोई, सहज बनाने की छोटी सी कोशिश है मेरी। हम से ही सीखती है हमारी अगली पीढ़ी,इस सुसंस्कार की अलख जगाने की  छोटी सी कोशिश है मेरी। संसार मे ही न रहे कोई वृद्धाश्रम,हर आशियाने के मंदिर में माँ बाप के अस्तित्व को स्वीकार कराने की छोटी सी कोशिश है मेरी। मैं कोई ज्ञानी नही,प...

मैं प्रेम कपाट रखूंगी खोल कर

बधाई बधाई

संगीत के सात सुर

निवेश किया तो नातो में

निवेश किया तो नातों में *प्रवेश* किया तो सद्गुणों में *समावेश* किया तो चित में करुणा का "निर्देश" दिए तो सदा सही बात के "क्लेश" नहीं किया कभी जीवन में "आवेश" में नहीं आई कभी,संयम सदा धारण किया चरित्र में "आदेश" दिए तो सत्य के सदा  और परिचय क्या दूं तेरा????

सब कुछ सीखा हमने