Skip to main content

इस बार दिवाली पर

इस बार दिवाली पर एक मुहिम चलाते हैं
ऑनलाइन शॉपिंग के मायाजाल से बाहर आ कर छोटे छोटे विक्रेताओं की बिक्री बढ़ाते हैं
आओ उन्हें देते हैं तवज्जो जो दिवाली की चकाचौंध में कहीं पीछे रह जाते हैं
मोमबत्ती बिजली की रोशनी छोड़
बड़ी मेहनत से बनाए कुम्हारों के दीप जलाते हैं

चलो ना इस बार दिवाली पर एक मुहिम चलाते हैं
तन संग मन की भी झाड़ लेते हैं गर्द
मन को अपने मंदिर बनाते हैं
नहीं पूछते कितने की है कितने चाहिए बस इतना बताते हैं
चादर बिछा सड़क के किसी कोने पर बैठे हैं जो घंटों से,
आओ ना उनका इंतजार मिटाते हैं
उदास उदास से चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं
अपने लिए तो हमेशा ही खरीदते हैं
आओ उस बार करवाएं शॉपिंग वंचित वर्ग को,
दीपावली को शुभ दीपावली बनाते हैं
हर तमस हर जीवन से खुशियों का उजियारा लाते हैं
मन के रावण का करके शमन मन में राम भाव जगाते हैं
करुणा प्रेम भाईचारा सोहार्द को अपना मित्र बनाते हैं
चलो ना इस बार दिवाली पर एक ऐसी मुहिम चलाते हैं
शौक भले ही पूरे ना हों सबके
पर आधार भूत जरूरतें मयस्सर करवाते हैं
साझे प्रयासों से इस बार महलों संग हर झोंपड़ी में भी उज्जियारा
लाते हैं
जानकारों के यहां जाने की बजाय किसी वृद्धाश्रम या अनाथ आश्रम की ओर जाते हैं
यही है सच्ची खुशी और राम राज्य के मायने,जन जन को समझाते हैं
               चलो ना मन

Comments

  1. अति सुंदर और सटीक 👌👍

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी