माँ का होना उतना ही गहरा प्रभाव छोड़ता है, जितना माँ का न होना।
जब तक माँ साथ थीं, तब तक उनके होने का अहसास जीवन में उतना ही प्रगाढ़ था, जितना आज उनके न होने का यह अथाह खालीपन है। जीवन का कोई भी सुख हो या कोई भी दुःख, एक शब्द जो अनायास ही मन में उभर आता है, वह है ..माँ”। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब उस की याद मेरे साथ न हो। और मुझे विश्वास है कि मेरी अंतिम साँस तक वो मेरे भीतर, मेरी चेतना में, मेरे अस्तित्व में जीवित रहेंगी।
आज मुझे लगता है कि मेरा पूरा वजूद मेरी माँ का ही दिया हुआ है। मैं जो भी हूँ, वह केवल और केवल उनके अथक परिश्रम, त्याग, संस्कार और प्रेम का परिणाम है। उसकी तपस्या का ही फल है कि हम सभी भाई-बहन आज एक सम्मानपूर्ण, सुरक्षित और संतुलित जीवन जी रहे हैं।
माँ का साहस, उसकी दूरदृष्टि, उसकी व्यावहारिक बुद्धिमत्ता, उसका अटूट हौसला और काम करने की उसकी अद्भुत क्षमता वास्तव में बेमिसाल थी। जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी माँ ने कभी हार नहीं मानी। वे स्वयं एक संस्था थीं, एक प्रेरणा थीं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना ऐसा लगता है, मानो सूर्य को दीपक दिखाना। क्योंकि जो हर पल हृदय में बसता हो, जो हर विचार में समाया हो, उसे भला अलग से याद कैसे किया जा सकता है?
माँ को मैंने सबसे पहले बेटी होकर जाना, फिर स्वयं माँ बनकर उसे और गहराई से समझा। लेकिन उसके जाने के बाद उनके प्रेम, त्याग और मौन संघर्षों का वास्तविक अर्थ समझ में आया। और अब, जब मेरी अपनी बेटी मुझसे दूर है, तब माँ के हृदय की वह पीड़ा और ममता पहले से कहीं अधिक गहराई से महसूस होती है।
सच ही कहा गया है वे सचमुच सबसे भाग्यशाली होते हैं, जिनकी माँ उनके साथ होती है। और जिनकी माँ इस संसार से विदा हो चुकी हैं, वे जानते हैं कि माँ कभी जाती नहीं; वह अपने बच्चों की साँसों, संस्कारों, स्मृतियों और व्यक्तित्व में सदा जीवित रहती है।
माँ, तुझको नमन।
मां की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, क्योंकि वह कोई व्यक्ति नहीं थीं
मेरा आधार थीं,
मेरा साहस थीं,
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