सपने बुनते बुनते February 11, 2023 सपने बुनते बुनते कब लम्हे उधड़ते गए,हो ही नहीं पाया अहसासदौर बदलते गए जीवन में,धूप छांव सी जिंदगी में कभी हलचलकभी सुखद आभासबच्चों ने भेजा केक जब बड़े प्रेम सेमेरी आंखों में आ गया हौले से पानी।। Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Labels धूप छांव Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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