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ये रात

ये रात भीगी भीगी
ये मस्त फ़िज़ाए
जो दिन के उजाले में न मिला
दिल ढूंढे ऐसे सपने को
है भीड़ में भी कैसी तन्हाई
दिल ढूंढे किसी खास ही अपने को।

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