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*मैं न भूलूंगी*सच में कभी नहीं भूलूंगी((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*मैं न भूलूंगी* सच में कभी नहीं भूलूंगी,
 तेरा वो मेरे पिछले जन्मदिन पर
 यूं अचानक केक भिजवाना।
किस चाशनी से बनवाया था उसे वो मां जाई!
आज भी आता है याद वो,
 मिठास भरा अनमोल खजाना।।

सौ बात की एक बात है,
तूं जीवन का सबसे मधुर तराना।।
तेरे वजूद का केंद्र बिंदु था लाडो,
हर हाल में तेरा मंद मंद मुस्काना।।

वो केक मेरे जीवन का सच में,
आज तलक का सबसे सुंदर उपहार।
नहीं अल्फाजों में वो ताकत,
बता सकूं जो,तुझसे कितना प्यार।।
मैं न भूलूंगी तेरे पर्स में मेरी फोटो का मिलना,
प्रेमचमण में तेरा बन सुमन सा खिलना, सच में मैं न भूलूंगी।।


पल पल दरक सा रहा है वजूद मेरा,
सच में तेरे इस जग से जाने के बाद।
सच में कोई भोर कोई सांझ नहीं ऐसी,
जब तूं मां जाई, न आती हो याद।।
*मैं न भूलूंगी*
तेरा सदा कर्म की ढपली बजाना,
*मैं न भूलूंगी*तेरा हर बार फोन पर कहना सब बढ़िया,जैसी *राम जी की मर्जी*
*मैं न भूलूंगी*
तेरा हिसार आ कर वो अनमोल से तीन दिन साथ रहना,
वो कहना तेरा, घर बेशक हो तेरा पुराना,पर वाइब्स पॉजिटिव हैं।।
*मैं न भूलूंगी* तेरा ये कहना,
तुझे मुझ में मां और बहन दोनो नजर आती हैं।।
*मैं न भूलूंगी*
तेरा हर हफ्ते रोहतक न जाकर गाजियाबाद आना,
*मैं न भूलूंगी* तेरा बच्चों को इतने प्रेम से,इतने संयम से सब कुछ समझाना,
*मैं न भूलूंगी*
 तेरा बन छोटी सी बच्ची
गोद में आ कर सिमट जाना,
*मैं न भूलूंगी* तेरा बच्चों के हर क्यों,कैसे,कब कितने का तत्क्षण जवाब बन जाना।
तेरा सबकी चहेती बन जाना,
तेरा ऐसा प्रतिबिंब बन जाना,जिसमे सबको अपना अक्स नजर आता हो,
तेरा मां के लिए अगाध प्रेम,
वो सच में सबसे छोटी बन जाना,
तेरे जीवन में नीलेश का आना,
फिर सीता सी बन अर्धांगनी अपने राम की अनुगामिनी बन जाना,
*मैं न भूलूंगी* तेरा ये कहना नीलेश के भीतर एक छोटा बच्चा छिपा है,
*मैं न भूलूंगी* तेरा संगीत कला के प्रति अत्यधिक रुझान,तेरा लहंगे चोली का सुंदर राजस्थानी परिधान,
मैं न भूलूंगी तेरा जिंदगी के हर मोड़ पर तेरी उम्र से अधिक ही ज्ञान,
तेरा परदेसियों को भी अपना बनाना,
तुझे श्रद्धांजलि देने इजराइल से भी उनका भारत आना,
तेरा भारतीय संस्कृति, योगा,आयुर्वेद को इतना खास बताना,तेरा empathtic व्यवहार,
तेरा अच्छी बेटी,बहन,मां,पत्नी का उम्दा किरदार, मैं न भूलूंगी।।

*मैं न भूलूंगी* तेरा वो उपदेश देना और उपदेश्न तेरा नामकरण होना,
तेरा किसी भी अभाव से प्रभावित न होना,
तेरा कभी गिले,शिकवे,
शिकायत न करना,
तेरा वो भगति भाव,
तेरा वो सालासर आना,
पूरा सुंदर काण्ड पढ़ना,
तेरा वो तुलसी कूटना,
तेरा हर बात को तर्क संग प्रस्तुत करना,
तेरा सखियों संग चहकना,मुस्कुराना,हंसना हंसाना।
तेरा वो *जोगी जब से तूं आया मेरे द्वारे गुनगुनाना,
तेरा वो गाना *ये मेरी उम्र मोहबात के लिए थोड़ी है* गाना,
तेरा सबसे रल मिल कर रहना,
कभी किसी की बुराई न करना,
तेरा सबके दिलों में बसना,
सच में *मैं न भूलूंगी*
तेरा वो स्टोर के दरवाजे के पीछे गिलासी ले कर छिप जाना,
तेरा वो मॉडल स्कूल जाना,
तेरा वो मेडिकल में प्रवेश,
तेरा वो यूपीएससी क्लियर करना,
तुझे मसूरी छोड़ कर आना,
तेरा वो साड़ी प्रेम,तेरा वो पिछली होली पर हमारे संग होली मानना।
तेरा वो मुझ से कह कर नमकीन बनवाना,
तेरा वो सतत मेरी जेहन की चौखट खटखटाना,

*सच में जब
 धड़कन धड़कन संग बतियाती है
फिर हर शब्दावली अर्थ हीन हो जाती है।
फिर मौन मुखर हो जाता है
ये दिल का दिल से नाता है*
मैं न भूलूंगी तेरा दिल कितना सुंदर था, न तेर थी, न मेर थी,तूं किस मिट्टी से बनी थी लाडो?????

*मैं न भूलूंगी* तेरा वो लंबे लंबे खत लिखना,वो अपनी राजदार बनाना,

वो *रंगरेज* सच में तूं तो जाने कितनों का ही दिल रंग गई,बता कैसे भूल पाऊंगी?????
हर उपलब्धि, हर परेशानी की तूं साझेदार थी।।

46 बरस का साथ तेरा सच में अनमोल सा खजाना मेरा,
तेरे वजूद से सच में महकता था वजूद मेरा।।
मैं न भूलूंगी जाने से एक दिन पहले तेरा ये कहना,मेरा मन डिप डिप कर रहा है,
मैं न भूलूंगी तेरा एक सच्चे डिप्लोमेट की तरह हमेशा ये कहना सब बहुत बढ़िया,तेरा वो जिंदगी के रंगमंच से यूं अचानक ही चले जाना,
सच में मेरी मां जाई। ये सब कभी नहीं भूल पाऊंगी।।
    स्नेह प्रेमचंद





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