Skip to main content

माधव नहीं आते हर बार(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

माधव नहीं आते हर बार
फिर क्यों करना इंतजार
दामन ना हो दागदार किसी का
हो हर नागरिक जिम्मेदार

गली गली में खड़े दुशासन
चित में पनप रहे विकार
बचेगी नारी तो पढ़ेगी नारी
सुरक्षा सबका है अधिकार

पूजा भले ही ना करो नारी की
पर अस्मत ना हो उसकी तार तार
तन ही नहीं रूह भी हो जाती है रेजा रेजा,अपंग सा लगता है संसार

भली भांति आने लगता है समझ
माधव नहीं आते हर बार
आम जन अब आए आगे
भ्रष्ट व्यवस्था में हो गाढ़ा सुधार
दंड का प्रावधान हो ऐसा,
बुरा करने से पहले सोचे
 व्यक्ति सौ सौ बार
गण और तंत्र दोनों ही हों जिम्मेदार
सृष्टि की रचना करने वाली,
जिंदगी की जंग जाए ना हार
शिक्षा मात्र अक्षरज्ञान ही है
जब तक इसके भाल पर नहीं सोहते संस्कार

सोच,कर्म,परिणाम की
त्रिवेणी बहती आई है सदा से,
सही सोच का हो जेहन में सबके संचार
हम भी समझे तुम भी समझो
माधव नहीं आते हर बार

बेटी दिवस तभी हम सही मायने में मनाएंगे
जब हर बेटी सुरक्षित होगी वतन में,
सच्ची होली दिवाली बनाएंगे
बेटियों को सही मायने में फिर मिल जाएंगे अधिकार
मुरली की तान भले ही ना सुने वे,
सुदर्शन चक्र का समझे मूल आधार

Comments

  1. क्या खूब लिखा है... मुझे तो निशब्द ही कर डाला हर एक एक पंक्ति रूह को छू गई सही कहा हर बार माधव नही आते अब इन दुश्मनों को खुद से करो तार तार... बेटी है सबसे बड़ी सुरक्षा की हकदार

    सृष्टि की रचना करने वाली,
    जिंदगी की जंग जाए ना हार
    सबसे सुंदर पंक्ति

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

बुआ भतीजी

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान