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गणित कमजोर था मेरी मां का

समझ लेना आजादी आ गई

**आजादी का मतलब मात्र परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त होना ही नहीं है,इसका व्यापक अर्थ देखें तो समझ आता है आजादी का अर्थ है अपने आपको किसी भी चीज़ का गुलाम ना बनने देना,जैसे व्यसनों का,मोबाइल के आवश्यकता से अधिक उपयोग करना** **आजादी का अर्थ है जिम्मेदारी की भावना को थोपा ना जाए बल्कि खुद आगे बढ़ कर जब हम सत्कर्म करें जिससे मात्र अपना ही नहीं परिवार,समाज,देश और विश्व का भला हो,यही आजादी है** **आजादी का एक अर्थ यह भी है जिन लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की हंसते हंसते आहुति दी,उनके बलिदान की महत्ता को हम समझें कि यूं हीं नहीं मिली आजादी,जाने कितने वीरों ने भारत मां की रक्षा हेतु अपने प्राण गंवाए हैं,उनके परिवारों के लिए हमारे भीतर एक संवेदना हो,सहयोग करने की प्रवृत्ति हो,यही आजादी है** **आजादी के मायने यह कदापि नहीं होते हम जो जी चाहें करें, जो जी चाहें वही बोलें,जैसा जी चाहें कपड़े पहने,जो भी करें मर्यादा में रह कर और यह सोच कर कि मैं जो भी बोल रहा हूं उसका क्या परिणाम होगा,कहीं मैं मन,वचन वाणी से कोई ऐसा कर्म तो  नहीं कर रहा जो दूजे का मन दुखी हो*...

जन्मदिन मुबारक

दुर्गम पथ के ओ बटोही

पगडंडी से हाई वे तक

सावन आने पर क्यों बुआ का मन बेटी सा हो जाता है

सावन आने पर जाने क्यों बुआ का मन बेटी सा हो जाता है *दिल तो बच्चा है जी* यदा कदा अतीत के गलियारों में जाना उसे भाता है बुआ कभी तो बेटी थी उस आंगन की, भले ही समय संग दौर बदल जाता है आज भी बुआ को अपने भाई भतीजों में मात तात का अक्स नजर आता है स्नेह डोर से जुड़ और भी गहरा हो जाता उसका नाता है वह कुछ लेने नहीं आती पीहर उसका दिल तो अपनों को देख ही खुश हो जाता है सावन आने पर बुआ का दिल सच बेटी सा हो जाता है उस आंगन की माटी की सौंधी सौंधी महक से अंतर्मन उसका पूरे का पूरा  महक जाता है याद आती है उसे अपनी वह गुड़िया अपनी अलमारी अपनी सखी सहेलियाँ,अवरुद्ध सा कंठ रूंधा रुंधा हो जाता है खो जाती है बुआ अतीत के गलियारों में,उसे भतीजी में अपना अक्स नजर आता है याद आते हैं उसे वे मां बाबुल,कतरा आंसू का,कोना आंखों का गीला कर जाता है याद आता है बुआ को वह प्यारा सा बचपन,जहां अधिकार बड़े रौब से मुस्कुराते थे छोटी सी बात पर रूठ जाती थी बुआ, मात पिता उनके कितनी बार मनाते थे जब जब भी आता है सावन, बुआ का दिल बेटी सा हो जाता है आते हैं जब भात कोथली स्नेह परवाह से हाथ मिलाता है कोयल की पीहू पीहू   ए...

ढाल से मात पिता