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एक बार स्नेहांजलि पढ़ लेना

कृष्ण कर्ण

सब कहती है स्नेहांजलि

कायनात की रज़ा

एक नायाब सा फूल(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**उम्र छोटी पर कर्म बड़े** यही परिचय है उनका,क्या क्या करूं उनका गुणगान युग आयेंगे युग जाएंगे व्यक्ति नहीं विचार थे भगत सिंह जोश जज़्बा जुनून उनका रहा परिधान

तिरंगा

गणित कमजोर था मेरी मां का