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गलती

अंतर्मन

एक बार स्नेहांजलि पढ़ लेना

कुछ तो लोग कहेंगे

दोस्ती में उलाहने नहीं होते न ही गिनती होती है कि ये किया वह किया दोस्ती किसी न्यायालय का कटघरा नहीं हैं जहां सबूत मांगे जाते हैं दोस्ती कभी अपने दोस्त को रुस्वा नहीं करती,किसी बात की अधिक चर्चा भी नहीं करती

पढ़ना ही नहीं जीवन में उतार लेना

एक बार स्नेहांजलि पढ़ लेना

कृष्ण कर्ण