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नही बनना मुझे कोई देवदासी

नही बनना मुझे कोई देवदासी
जहाँ।मेरा दामन कुचला जाता हो,
जाने कितने ही अनकहे अहसासों को
क्रूरता से मसला जाता हो,
नही आते अब कोई माधव किसी
पांचाली के लिए,जहाँ कोई बेबसी
सिसकी का नाद सुनाता हो।।

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