Skip to main content

पहली गोली हमारी नहीं होगी(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*हानि धरा की लाभ गगन का*
असमय ही अस्त हो गया आफताब।
तेज बरकरार रहेगा लेकिन,
हर्फ दर हर्फ भरती गई शौर्य की किताब।।
अपूरणीय क्षति,अविश्वसनीय घटना,
स्तब्ध वतन घुल गया फिजा में जैसे तेजाब।।
सच में हमने खो दिया एक हीरा नायाब।।
बार बार नहीं लेते जन्म धरा पर ऐसे सच्चे नायक बेहिसाब।
मां,मातृभूमि और मातृभाषा से उऋण नहीं हो सकते हम कभी,
सिखा गए वतन को जांबाज।।
हानि धरा की,लाभ गगन का,
असमय ही अस्त हो गया आफताब।
साहस,शौर्य,देश भगति के पर्याय,
आज दैहिक रूप से भले ही न हों बीच हमारे,पर जेहन में करेंगे बसेरा बेहिसाब।।
सजल हैं नयन,अवरुद्ध है कंठ,
कायनात में घुल गया जैसे तेजाब।।
पुर्जा पुर्जा सा हिल गया वजूद का,कितनी है पीड़ा,नहीं कोई हिसाब।।



Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

बुआ भतीजी

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान