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कुछ खुशियां पर अधिक मलाल

कुछ खुशियाँ भी आई,कुछ मलाल भी रहे,जाने लगा देखो ये साल।
नववर्ष का आओ करें स्वागत,कुछ करें ऐसा जो बने मिसाल।।

समय का पहिया चलता रहता अपनी ही गति से,हम कठपुतली बन कर रह जाते हैं।
कभी यहाँ, कभी वहाँ, जीवन की लीला चलाते हैं।
कुछ बहुत ही अपने इस जिंदगी के रंगमंच से यकायक ही चले जाते हैं।
कितना भी रो लो,कितना भी बुला लो,
वो लौट कहां फिर आते हैं???

अपनो से अपने ले गया ये साल,
दे गया जख्म बिन मरहम वाले,
दुख संग हुआ मन में भारी मलाल।।
बहुत अजब सा रहा ये साल।।

हो स्थान परिवर्तन बेशक,
पर हृदय परिवर्तन की न चले बयार।
चार दिनों की इस ज़िंदगानी में हो इंसा को हर प्राणी से प्यार।।

इसी वर्ष हुआ हमारा राजस्थान से हरियाणा को आना।
जैसे कोई भूला हुआ लौटा हो अपने घोंसले में,लगा बनाने नया ठिकाना

जगह की दूरी कोई खास बात नही,खास बात है जब मनो में दूरी आ जाती है।
जलती हुई शमा को आकर जैसे कोई सुनामी बुझाती है।

सब रहें प्रेम से,हों सुख दुख सांझे,कटाक्षों की कोई जगह कहीं भी बचे न बाकी।
सब खुश रहें,और रहें सलामत,और अधिक की तो चाह भी नही है साकी।।

नववर्ष में आओ लें एक संकल्प,कभी किसी का हिया न दुखाएँ।
बेशक खुशी न दें पाएं किसी को,पर गम का आगाज़ तो न लाएं।।

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