*मन चंगा तो कठौती में भी गंगा*
समझा गए एक ही पंक्ति में जीवन का सार।
संत कुल भूषण,महान कवि,संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्म जयंती बना रहा संसार।।
साधु संतों की,की
सेवा और लगाया
प्रभु सिमरन में ध्यान।
बचपन से परोपकारी,दयालु स्वभाव और सहायता करने का मिला हो जैसे वरदान।।
जातिगत भेदभाव कर दूर समझाया,
सामाजिक एकता से ही हो सकता है कल्याण।।
बड़ी सोच,महान संत,दार्शनिक,भगत,
यही बनी जिनकी पहचान।।
और परिचय क्या दूं उनका,
हुआ नतमस्तक सारा संसार।
* रैदास जन्म के करने होत न कोई नीच*
*नर को नीच कर डारी है ओछे कर्म की नीच*
जन्म से नहीं,बुरे कर्मों से नीच होता है इंसा,इसी भाव को गए वे सींच।।
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