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भारतीय जीवन बीमा निगम(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

भा---रतीय जीवन बीमा निगम का दूसरा नाम है सुरक्षा,समृद्धि और विश्वास।।

र---खा है जिसने स्नेह और सौहार्द सभी से,तभी निगम है अति खास।।

ती---र्थ भी कर्म है,धाम भी कर्म है,इसी सोच से हुआ है सतत विकास।।

य---हाँ, वहाँ सर्वत्र पसारे पाँव निगम ने,अपने अस्तित्व का इसे आभास।।

जी--वन के साथ भी,जीवन के बाद भी,निराशा में भी आशा का किया है वास।।

व---नचित न रहे कोई भी उत्पादों से, इसके,यथासंभव किया हर प्रयास।।

न---भ सी छू ली हैं ऊंचाईयां, आता है धरा के भी रहना पास।।

बी---च भंवर में जब कोई चला जाता है, छोड़ कर,होती है निगम से फिर आस।।

मा---हौल बनाया निगम ने ऐसा,जैसे कुसुम में होती है सुवास।
*सेवा संग मुस्कान के* इसी भाव को कर पोषित निगम बना है अति खास।।

नि---यमो को नही रखा कभी ताक पर,हर वर्ग को जोड़ कर खुद से,सतत किया जिसने प्रयास।।

ग---रिमा अपनी रखी बनाई,सबको जीवन मे राह दिखाई,दिनकर से तेज का इसमे वास।।

म---जबूत हौंसला,बुलंद इरादे,जनकल्याण की भावना का न हुआ कभी ह्रास।।

आज एल आई सी के 66 वें जन्मदिवस पर हो सबको बहुत बहुत बधाई।
सुरक्षा,संरक्षा और समृद्धि की त्रिवेणी सदा निगम ने दिल से बहाई।।

             स्नेहप्रेमचंद

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