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दस्तक

बिन आहट भी जो मन की चौखट पर दस्तक दे जाती है।
बिन सोचे भी जो जेहन में अनायास सी आती है।
जिसके वजूद की खुशबू आज भी सौंधी सौंधी फिजा में आती है।।
अपने रंग में वो रंगरेज जैसे सब रंग जाती है
मधुर वाणी,मधुर व्यवहार,सुंदर दिल की त्रिवेणी जहां बह जाती है।।
कोई और नहीं वो सबसे छोटी क्रम में पर सबसे बड़ी कर्म में
मेरी मां जाई कहलाती है।।

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