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मात पिता thought by snehpremchand

 ज़िन्दगी की गंगोत्री से
मृत्यु के गंगासागर तक
जो जेहन में आते हैं
वे मात पिता कहलाते हैं।।
         स्नेहप्रेमचन्द

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