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धुंध कुहासे thought by sneh premchand

मलिन मनों से अहंकार का
जब हट जाएगा धुंध कुहासा,
मरुधर में भी लगेगा ऐसे
जैसे आ गया हो चौमासा।।
प्रेम की जब आएगी सुनामी
मीनारनफरत ध्वस्त हो जाएगी।
सब अपने हैं,हम सबके हैं,
एक यही प्रेम की परिभाषा।।
करोगे विचरण जब अंतर्मन के
गलियारों में,लेगी जन्म सुंदर सी आशा।
                 स्नेहप्रेमचंद

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