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भेद thought by sneh प्रेमचन्द

उच्चारण और आचरण में
 जिसके भेद न था।
वो तो करती थी पहले,कहती थी बाद में,
उसके कर्म की थाली में,
 निष्क्रियता का कोई छेद न था।।
     स्नेह प्रेमचन्द

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