*चित की बंजर भूमि को गुरु ही उपजाऊ बनाता है गुरु हो गर सोने सा, शिष्य कुन्दन बन जाता है* *गुरु तो वह पारस है जो पत्थर को सोना बनाता है गुरु ही है वह*पथ प्रदर्शक* जो फर्श से अर्श की ओर ले जाता है* गुरु करता है कदम कदम पर पथ प्रदर्शन हमारा,सच में हमारे व्यक्तित्व का गुरु होता शिल्पकार नारियल सा होता है गुरु ऊपर से भले ही लगाता है फटकार,पर भीतर से करता है प्यार सच्चा गुरु करता है हमें ऐसे शिक्षित,मिल जाए जो रोजगार ग्रूमिंग करता है गुरु हमारी, हर बाधा को करवाता प्यार गुरु से जीवन हमारा सच में एक नई दिशा सी पाता है चित की बंजर भूमि को गुरु ही उपजाऊ बनाता है किसी ने पूछा शिक्षक से क्या करते हो आप??? शिक्षक ने दिया सुंदर सा जवाब जिसे सुन आप खुद ही लगा लोगे हिसाब *सुंदर सुर सजाने का साज़ बनाता हूं* नौ सीखिये परिन्दों को बाज़ बनाता हूं हुनर निखारता हूं मैं बच्चों का कच्ची मिट्टी के घरौंदे से सपने का महल बनाता हूं चुपचाप सुन लेता हूं शिकायत सबकी, पर अपने जोश जज्बे जुनून से जग बदलने की आवाज बनाता हूं समंदर तो परखता है हौंसले किश...