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Showing posts from September, 2026

स्वच्छ भारत अभियान

*स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *भारत सरकार द्वारा चलाया गया है  स्वच्छता का *स्वच्छ भारत अभियान* *शुरुआत हुई थी इसकी 2 अक्टूबर 2014 को, हो जन जन को उसका समुचित ज्ञान* *इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना,जो देता दस्तक दिल पर,करता जेहन में बसेरा,छोड़ता चित में पक्के निशान* स्वच्छता मजबूरी नहीं आदत बन जाए हमारी,इस संदर्भ में हमसे बहुत आगे है जापान स्कूल के बाद बच्चे स्वयं करते हैं कक्षा साफ अपनी,  राष्ट्र प्रेम का यह आदत लाती पैग़ाम *स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *महात्मा गांधी जी* को समर्पित है यह अति खास प्यारा सा खास अभियान जिसके तहत गांव,शहरों,कस्बों,हर गली,कूचों,गलियारों की सफाई पर दिया जाता ज़ोर है,सफाई का करता आह्वान करें संकल्प और करें कर्म  गर प्रतिबद्धता से,  दुर्गम राहें  हो जाएंगी आसान स्वच्छता और स्वास्थ्य का चोली दामन का साथ है,  इस अभियान के मूल में  * जन कल्याण* खुले में शौच की समस्या का उन्मूलन करना मुख्य लक्ष्य है इस अभियान...

समझ लेना राम राज्य आ गया(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा *राघव गाथा अंश*))

आज जन्मदिन है जिनका

आज जन्मदिन है इनका, आए इनके जीवन मे सदा बहार मिले खुशी,सफलता,सुख,समृद्धि  और मिले हम सब का प्यार *रोहिल्लास* और *कुमार्स* की नन्ही कली तुम, तुमसे घर का आँगन गुलज़ार करते थे,करते है,करते रहेंगे  तुम्हे प्यार हम सब बेशुमार कबूल करो आज दुआएँ हमारी, देखो दुआओं से सज रहा संसार मनहर तुम्हारी मोहिनी सूरत, लगते अति सुंदर दीदार करता है मन करें प्रकट, ऊपरवाले का आभार आई जो तुम आँगन में हमारे, समा हो गया है गुलज़ार महकती रहना,चहकती रहना, प्रेम ही हो जीवन का आधार समय तो निश्चित रूप से लेगा  लाडो अँगड़ाई,  पर कभी पनपे न कोमल चित्त में   तेरे कोई भी विकार हमारी जान की जान हो तुम निभाना उत्तम अपना हर किरदार ओ मेरी लाडो बिटिया रानी, खिले ऐसा पौधा मन मे तुम्हारे, जाने जो करुणा,सहयोग, अहिंसा और परोपकार लम्हा लम्हा बीत गए बरस 16 *ब्यूटी विद ब्रेन* तेरे व्यक्तित्व का सार मैं ही नहीं प्रकृति भी दे जाए तुझे तेरे जन्मदिन पर उपहार *धरा* दे जाए धीरज अपना *अम्बर* अन्नत ऊंचाई का गहन विस्तार *पर्वत* दे जाए अडिगता अपनी *पवन *गति से करवाए साक्षात्कार *सागर*दे जाए गह...

राम ही राम पुकारेंगे

कुछ लोग

हो गहन राम की जब अनुभति(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

लहर नाम राम की

बिखरे नहीं निखरे सदा राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचन्द द्वारा राघव गाथा अंश))

राम राम जब बोला मुख से(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा से अंश))

अभी थोड़ा तुम रुक जाओ(( रावण का सवाल आम जनता से राघव गाथा अंश))

जब पुतला रावण का बोल उठा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद राघव गाथा अंश))

सही राह दिखाते हैं श्री राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

इस बार दिवाली पर(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

मन में ही शबरी मन में ही मंथरा(स्तुति स्नेह प्रेमचन्द द्वारा राघव गाथा अंश))

चल मन होजा ना बजरंगी सा( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश)

यूं हीं तो नहीं मिलते श्री राम( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश)

जाने कब मरेगा यह विकारों का रावण(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद राघव गाथा अंश))

राम राम जब बोला मुख से

अनुकरणीय है जीवन राम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

वे श्री राम हैं(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

राम तीर्थ राम पूजा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

अनुकरणीय है जीवन राम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

आती जाती सांस में हो राम का नाम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद राघव गाथा अंश))

राघव गाथा

सीता राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

चित की बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा का एक अंश))

राम तुम्हें फिर आना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा का एक अंश))

सौहार्द का रामसेतु तुम्हें बनाना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा अंश राघव गाथा से))

हनुमान

यादों का किस्सा खोलूं तो

और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

और कहीं फिर क्यों हो जाना?? *Lic है खुशियों का खजाना* मानों चाहे या ना मानों, बहुत जरूरी है lic करवाना *भरोसे का धरातल सपनों का आसमान है lic* इस सत्य से रहे ना कोई अनजाना *भरोसा ही परोसा है निगम ने सदा* आता है हर सुख दुख में इसे साथ निभाना और कहीं फिर क्यों हो जाना??? *Lic है खुशियों का खजाना* *कल खेल में हम हों ना हों पर lic निभाती है सच्चा याराना* *हर धूप छांव में हर सुख दुख में संग खड़ी होती है lic  मैं भी जानूँ तू भी जाने और जाने यह सारा ज़माना* प्रॉब्लम से पहले प्लानिंग जरूरी है आग लगने के बाद कुआं खोदने मत चले जाना इसी भाव को पोषित करती यह संस्था आता है इसे जन जन के दिल में  छाना *चेक अप नहीं मेक अप की उम्र में अच्छा होता है पॉलिसी लेना* ताकि हो उज्ज्वल भविष्य और सफर कटे सुहाना और कहीं फिर क्यों हो जाना?? संस्था हमारी खुशियों का खजाना मैं रहा/रही तो जीवन की सांझ में भी आर्थिक रूप से रहूंगा/रहूँगी सक्षम,समर्थ मैं ना रहा तो मेरा परिवार नहीं टूटेगा,नहीं बिखरेगा आर्थिक रूप से,ल इस भाव से सदा मन को समझाना ज़रूरी नहीं अति जरूरी है lic पॉलिसी लेना,समय की मांग है यह सत्य बताना है...

और कहीं फिर क्यों हो जाना

मौन शांति भी मौन शोर भी(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

जहां परवाह नहीं,वहां प्रेम नहीं

जहां परवाह नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां दया नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां मधुर वाणी नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां अपनत्व नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां कटाक्ष हैं, वहां प्रेम नहीं मलिन मनों में जहां धुंध कुहासे हों वहां प्रेम नहीं जहां दिखावा है, वहां प्रेम नहीं जहां लाभ हानि के मापदंड नातों पर हावी हो जाएं,वहां कतई प्रेम नहीं जहां संवेदना नहीं, वहां प्रेम नहीं और जहां प्रेम ही नहीं,वहां जाना ही क्यों हो???? प्रेम सीखना हो तो  एक बार एक ही पेज *स्नेहांजलि* का और एक पेज *हानि धरा की लाभ गगन का* में से पढ़ लेना,दोनों ही प्रेम की पराकाष्ठा प्रेम से पूरा जीवन जी गई,मंत्र और ग्रंथ सी दोनों ही किताबें प्रेम की बारहखड़ी अच्छे से समझा देंगी,इसमें 11 स्वर और 33 व्यंजन भी प्रेम के ही हैं,भाव प्रेम के,शब्द प्रेम के,लहजे प्रेम के सब प्रेममय **प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में**

और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

क्षणभंगुर से इस जीवन में प्रेम अपनाओ

जीवन कितना *क्षणभंगुर*है… इस क्षण भंगुर से जीवन में हम स्थाई भौतिक सुख चाहते हैं, इसे विडंबना कहते हैं,याद रहे ना जाने कब किसका साथ छूट जाए, ना जाने कब कौन सी मुलाक़ात आख़िरी हो जाए,कुछ नहीं पता *क्या छिपा वक़्त के पन्नों में ना तुम जानो ना हम जाने* इसलिए जब तक हम एक-दूसरे के साथ हैं, तब तक एक दूसरे की परवाह करें, देखभाल करें, सम्मान करें एक दूसरे को प्रेम दें, साथ दें,सहयोग दें और जहाँ संभव हो, किसी के जीवन को थोड़ा सहज और सुंदर बनाने का प्रयास करें,परवाह प्रेम का ही पर्याय है जीवन के इस पड़ाव पर आकर सोचती हूँ ..क्या तेरा, क्या मेरा? जिसके लिए हम जीवन भर इतना जोड़ते, सँभालते और कभी कभी लड़ते रहते हैं, उसमें से आखिर हमारे साथ क्या जाएगा? न धन जाएगा, न वस्तुएँ, न पद, न प्रतिष्ठा… साथ जाएगा तो केवल हमारे कर्मों का भाव और हमारे द्वारा बाँटा गया *प्रेम* फिर इतनी हाय-हाय क्यों? इतना मेरा-तेरा क्यों? क्यों न शेष जीवन को थोड़ा और सरल बना लें,विशेष बना लें मन में किसी के लिए कटुता न रखें, जहाँ संभव हो क्षमा करें,जहाँ जरूरत हो हाथ थामें और जहाँ अवसर मिले प्रेम बाँटें  क्योंकि अंत...

कुलदीपक की ढेर बधाई

राधे राधे बोलो मुख से,शाम भक्ति हो जाती है

अचानक नहीं मरता कोई नाता

छोड़ना आसान

प्रथम पूजनीय

राम अंश

राम बसे हैं सबके उर में