Skip to main content

वो जागता है तो हम सोते हैं(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

वो जागता है तो हम सोते हैं,
वो हिफाजत करता है
 तो हम महफूज होते हैं।

वो सियाचिन के बर्फीले पहाड़ों पर ठंड में ठिठुरता है तो
 हम मखमली बिछोनो पर चैन से सोते हैं।।

वो मेरे वतन का सच्चा प्रहरी है,
नहीं भूल सकते हम कभी उसका उपकार।
हिंद की आन बान और शान है वो,
पूरा वतन उसका परिवार।।
भारतीय सेना के जवानों के ताउम्र हम ऋणी रहेंगे।
अनेक शौर्य गाथाएं और किस्से,
कहानी उनकी खुद ही कहेंगे।

महफूज हैं हम गर वो है संग
नहीं उसके बलिदान को कभी सकते हैं बिसार।
वो मेरे वतन का सच्चा प्रहरी,
क्यों भूलें उसका उपकार????
वो सरहद का रखवाला है तो हम
शान से जीते हैं।
उसके बिन तो मैं क्या,तूं क्या,हम सब रीते रीते हैं।।
मातृ भूमि का ऋण चुकाने वाले सच में धरा पर ईश्वर का अवतार।
वो मेरे वतन का सच्चा प्रहरी है,
क्यों भूलें उसका उपकार।।
जब जब मां भारती के आंचल को अपनी बुरी नजर से किसी ने करना चाहा दागदार।
वो सच्चा प्रहरी आगे बढ़ कर आया,
बेशक चली हो उस पर कटार।।
पहन केसरिया बाना,निभाया अपना उत्तम किरदार।


Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

बुआ भतीजी

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान