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कला सत्य है(( विचार स्नेह प्रेम चंद द्वारा))

कला सत्य है,शिवम है और सुंदरम भी
कविता करने के लिए कविता बनना पड़ता है।समय से परे,देश धर्म जाति और सरहद से परे होती है कला।
आपने इसे सार्थक सिद्ध कर दिया।।

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