Skip to main content

बरस पर बरस

बरस पर बरस यूँ ही बीते जाते हैं।
हम हर जन्मदिवस पर खुशियों का जश्न मनाते हैं।

परिवर्तशील ये समय की धारा,
हम संग इसके बहते जाते हैं।

दिन के पहर नही जब एक जैसे,
फिर परिवर्तन से क्यों घबराते है।

नियत समय के लिए बन्धु,
हम अपना अपना किरदार निभाते हैं ।

फिर छोड़ झमेला दुनियादारी का,
विदा यहाँ से हो जाते हैं।

सब समझते,सब जानते हुए भी
क्या हम अपना रोल सही निभाते हैं??, 

जीवन का मेला चार दिनों का
क्यों प्रेम से सबको अपना मीत नही बनाते है।

शत शत नमन मात पिता को,
जो हमको इस जग में लाते हैं।

हमारे जन्म से अपनी मृत्यु तक,
वो दिल मे हमे बसाते हैं।।।।

दे देना मुझे अपनी दुआएँ
होगा यही सबसे बड़ा उपहार।

प्रेम चमन की ये डाली,
करे बिनती आपसे बारम्बार।।।

मैने भगवान को तो नहीं देखा
पर जब जब देखा और महसूस किया आपको,लगा ईश्वर ने ले लिया हो अवतार।।

क्या भूलूं क्या याद करूं मैं,
मात पिता ही होते हैं संसार।।
आज जन्मदिन पर फिर याद
आए मुझे,शत शत नमन और वंदन आपको बार बार।।

Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

बुआ भतीजी

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान