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कैसा सागर

सागर में पानी ही ना हो,तो फिर वो कैसा सागर

धन्य धन्य सा हो गया था मन तुझे मां जाई के रूप में पाकर

ना गिला ना शिकवा ना कभी शिकायत कोई,ना कोई आलोचना, रीती रीती नहीं थी तूं भरी भरी प्रेम गागर

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