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बहुत ही खास(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

बहुत ही खास बहुत ही अपने
होते हैं ये बेजुबान

आंखों और लहजों को भाषा समझ लेते हैं ये नादान

प्रेम भाव के भूखे हैं ये
छल,कपट,ईर्ष्या,द्वेष से पूरे अनजान

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