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गुजारिश(( मात पिता पर कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

एक गुजारिश है आपसे
मैने की है जो गलती
वो आप जीवन में कभी ना दोहराना

कभी ना पूछना मात पिता से
आपने हमारे लिए किया ही क्या है
यह कह कर दिल ना उनका कभी दुखाना

हमारे सपनों के लिए अपनी जरूरतें भी कर देते हैं कुर्बान वे,
कभी कोई मलाल ना उनके लिए तुम चित में लाना

यथासंभव हर कोशिश करते हैं हमारी सुख सुविधाओं के लिए
वे जीवन का सबसे सुंदर तराना

प्रेम,परवाह,अपनत्व का मात पिता होते हैं खजाना
सबसे धनवान वही जगत में
जिसने समय पर सत्य ये जाना

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