*हमारी खूबियां को पहचाने और हमारी खामियों को दूर करने की कोशिश करे, वही गुरु है*
*हमारे भीतर छिपे हनुमान को जो बाहर निकाल कर ले आए यानि हमारी सुप्त शक्तियों को जो जगाने का सामर्थ्य रखता हो,वही गुरु है*
*विकारों का शमन करवाए और सद्गुणों का विकास करवाए,वही गुरु है*
*अपने ज्ञान,विवेक और मार्ग दर्शन से जो हमारा चहुमुखी विकास करे, वही गुरु है*
*अपने ज्ञान का जो सतत अभिवर्धन करे,हर संभावित संभावना को अच्छे से खंगाले,
वही गुरु है*
*हमारी क्षमताओं का पूर्ण दोहन कर जो हमें धरा से अम्बर की ओर ले जाए,वही गुरु है*
*हमारी सफलता पर जो हमसे भी अधिक प्रसन्न हो जाए,हमारी उपलब्धि उसे अपनी उपलब्धि लगे और हमारी असफलता में भी जो हमारे साथ खड़ा हो, वही गुरु है*
*जीवन के कुरुक्षेत्र में जो बन सारथी कृष्ण सा हर अर्जुन को कर्म की गीता का संदेश देकर पथ प्रदर्शन करे,वही गुरु है*
*कर्म को आनंद बता कर जो परमानंद की अनुभूति करवाए,कठिन राहों को आसान बनाए,हमारे पैशन को प्रोफेशन बनवाने में जो हमारी मदद करे,
वही गुरु है*
*हमारी रुचियों का संवर्धन और मूल्यों का जो अभिवर्धन कर दे,उच्चारण नहीं जो आचरण में लाए,फर्श से अर्श तक का सफर सहजता से करवाए, वही गुरु है*
*असहज से जीवन को जो सहज बना दे,मन में सकारात्मकता के पुष्प खिला दे,चिंता नहीं जो चिंतन करना सिखा दे,कर्म की गीता का महत्व कथनी नहीं करनी में बतलाए, वही गुरु है*
*पेशानी की परेशानी जो देख ले,आंखें और चेहरा पढ़ ले,बिन कहे ही मन की जान ले, वही गुरु है*
*सुखद वर्तमान और सुरक्षित भविष्य की बारहखड़ी जो समझा दे, वही गुरु है*
*संकल्प को जो सिद्धि से मिलवा दे,सोच कर्म परिणाम की त्रिवेणी बहा दे,लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता सिखा दे,वही गुरु है*
*Date और Data तो गूगल बाबा सब बता देता है,सच्चा गुरु वही है जो चित की बंजर भूमि को उपजाऊ बना दे,हमारे भीतर जिज्ञासा की पौध लगा दे,दृष्टि नहीं दृष्टिकोण हमारा ऐसा बदल दे जो हम जग को अपने ही नज़रिए से देखें और जानें,एक स्वतंत्र सोच का जो विकास करा दे,निर्णय लेने की क्षमता का पुष्प खिला दे,वही गुरु है*
*चेतन और अचेतन दोनों ही मनों में चेतना का स्पंदन करा दे,आहत मन को हो राहत दे,वही गुरु है*
*हमारी मनःस्थिति को ऐसा बना दे कि कोई भी परिस्थिति हावी न होने पाए किसी भी हाल और हालात में,वही गुरु है*
*स्वप्रेरित कर दे,कर्म करने की आदत डाल दे, अनुशासन,मेहनत,करुणा,स्नेह जैसे भाव जो मन के भीतर तार दे,वही गुरु है*
*गुरु हो गर सोने सा,
शिष्य कुन्दन सा बन जाता है*
*गुरु तो वह पारस है
जो पत्थर को भी सोना बनाता है*
*गुरु हो जब द्रोण सा
शिष्य अर्जुन बन जाता है*
*गुरु हो जब वशिष्ठ सा,
शिष्य राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन जाता है*
*गुरु हो गर चाणक्य सा,
शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य बन जाता है*
*गुरु हो गर माधव सा तो पार्थ को गीता ज्ञान समझ में आता है*
*गुरु हो जब राम कृष्ण परमहंस सा,शिष्य विवेकानन्द बन जाता है*
*गुरु तो वह जौहरी है जो तराश देता है शिष्य को हीरे सा,यह निर्भर करता है शिष्य पर,क्या उसे हीरा बनना आता है*
*सुरक्षा,संरक्षा,संवृद्धि का विशाल वृक्ष है गुरु,जिसकी छाया तले शिष्य पल्लवित पुष्पित हो जाता है*
* गुरु गरिमा है गुरु महिमा है
गुरु ही हमें शून्य से शिखर तक ले जाता है*
*जीवन के हर चक्रव्यूह से गुरु बाहर निकाल कर लाता है*
*मलिन मनों से धुंध कुहासे गुरु ज्ञान ही हटाता है*
*गुरु हो गर अरस्तु सा
शिष्य विश्व विजेता सिकंदर बन जाता है*
*स्नेह,समर्पण,निष्ठा,आदर हो गर चित में गुरु के लिए तो शिष्य गुरु से भी आगे बढ़ जाता है*
*सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते*
ऐसे सपने भी देखना गुरु ही हमें सिखाता है*
*हम जुगनू,दिनकर है गुरु,मेरी सोच को तो यही समझ में आता है*
*कर्ता करे ना कर सके
गुरु करे सो होय*
*तीन लोक नौ खंड में
गुरु से बड़ा ना कोय*
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