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तूं मेरी जिंदगी है(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*तुझ को पता है
मुझ को पता है*
*एक दूजे की जिंदगी हैं दोनों*
*दो जिस्म,एक ही जान,एक ही परिवार*
*दो वंश मिले,दो सुमन खिले*
*दो सपनों ने आज ही रोज
किया था 25 बरस पहले श्रृंगार*
*दो दूर देश के पथिको ने
संग संग चलना किया था स्वीकार*
*कभी आस ना टूटे,कभी साथ ना छूटे*
*जीवनसाथी जीवन का सच्चा अलंकार*
*रोहिल्लास,रावल्स,मित्र और बंधुओं की,
कर लेना आज दुआएं स्वीकार*
सुख,समृद्धि और सफलता
सदा दे दस्तक आप के द्वार।। 

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