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फिर से आ जाओ ना माधव

Comments

  1. क्या खूब लिखा..
    क्यों समाज नही समझता नारी की व्याधि...
    क्यों दुनियां देती नारी के विचारो को समाधि ..

    क्यों नही बनता कोई नारी का रक्षक
    सभी बनते इनके देह के भक्षक
    इनके आगे तो फीके पड़े राक्षस ..

    अरे नारी जागो खुद बनो स्वयं का रक्षक.
    होगा स्वाभिमान का हर हक..
    करो सामना हर मुश्किल का बेझिझक.

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