Skip to main content

बहुत बहुत मुबारक भाई

जन्मदिन पर जन्म देने वाली याद आ ही जाती है,
अपनी जाने कितनी इच्छाएं दबा कर,हमारी हर खुशी को कर अप पूरा,मुस्कान हमारे लबों पर लाती है,
और कोई नही मेरे दोस्तों,वही तो माँ कहलाती है,

हमारी कितनी ही कमियों को कर नज़रंदाज़
हमे अपने चित्त में बसाती है,
समय बेशक बीता जाए,पर वो याद आ ही जाती है,

और अधिक कुछ नही कहना, बस उसके न होने से सहजता जीवन से दामन चुराती है।।
ईश्वर का पर्याय है माँ,अपनी जान पर खेल कर हमें जग में लाती है।।

मां के ट्रेन से धड़धड़ाते व्यक्तित्व के आगे थरथराते पुल सा अस्तित्व होता है बच्चे का,
पर मां बच्चे संग बच्चा बन जाती है
उसकी हर ख्वाइश पूरा करने में अपनी जान लगाती है
तूं तो मां का प्रिय रहा भाई,
आज तेरे जन्मदिन पर मुझे तो वो याद आती है
सब सब पीछे हट जाते हैं
मां बढ़ कर आगे आ जाती है
कुछ कर गुजरने की शक्ति
मां से बहुत कुछ करवाती है
तूं खुश रहे तूं स्वस्थ रहे
तेरी मां जाई ये दोहराती है

Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी