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मुबारक मुबारक जन्मदिन मुबारक(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**कुछ लोग जेहन में ऐसे बस जाते हैं,
जैसे बच्चे घर में घुसते ही मां को आवाज लगाते हैं**

 *दिल पर देते रहते हैं दस्तक, जगह से भले ही दूर चले जाते हैं*

*रोज मुलाकात भले ही ना हो उनसे,पर जब भी होती है मुलाकात होती है बात उसमें,
दिल में खुशी के दीये बिन माचिस के जल जाते हैं*

*न कोई गिला,ना कोई शिकायत,
ऐसे रिश्ते भाग्य से ही बन पाते हैं*

*मैने सम्भाल कर रखे हैं दिल की तिजौरी में वे अनमोल से पल,
जो जीवन के किसी मोड़ पर
 हमने साथ बिताए थे
जी चाहता है करवा लूं एफ डी उनकी,
हम संग संग कितना हर्षाए थे
ब्याज रूप में महसूस करूं वह अनुभति,
जिससे दिल के नाते गहराए थे*

*जब भी देखती हूं पीछे मुड़ पर, 
वे लम्हे अहसास सुखद दे जाते हैं
कुछ लोग जेहन में ऐसे बस जाते हैं
जैसे सावन भादों में कोयल पपीहे मन में हूक मचाते हैं*

*कुछ साथ होते ही ऐसे हैं,
फेविकोल के जोड़ से मजबूती से चिपक जाते हैं*

*दिल के नाते भी बहुत गहरे होते हैं
ये सपनों में भी बिन बुलाए दौड़े चले आते हैं*

*कौन है सनी?? जब पूछा किसी ने
मुझे वे गुजरे लम्हे किसी रील की भांति चलते नजर आते हैं*

जिस दिन *पा* गए 
सनी मेरे साथ थी
जिस दिन मां गई 
सनी मेरे साथ थी
जिस दिन ससुर जी गए
 सनी मेरे साथ थी
जिस दिन सासु मां गई 
सनी मेरे साथ थी,
ऐसा साथ जो अब हौले हौले आत्मिक हो गया है,
ऐसी अनुभूति जो गहनता और स्नेह के गलियारों में आज भी विचरण करती है,
ऐसी लाडो बिटिया जो मेरी रूह में रहती है,
आज खुद फोन कर जब कहा उसने,आप की blessings चाहिए तो अलपक सी सोचती रह गई मैं,
ये कोई पिछले जन्मों का नाता है,
जिसका नाम जेहन में आने से मेरा रोम रोम पुलकित हो जाता है,

*आज उसके 40 वे जन्मदिन पर मन सिर्फ़ और सिर्फ नगमा दुआओं का गाता है,
अगले जन्म मुझे बिटिया रूप में तू ही दीजो,
दिल यह कहना चाहता है*

*आज तेरे 40 वे जन्मदिन पर
 सत्य सारी बातें कहूंगी
छोटी सी उम्र में हर धूप छांव को देखने वाली सनी का मेरे जीवन में आना ईश्वर की सौगात कहूंगी*

 कितनी बहादुर,स्पष्टवादी,ज्ञान और अनुभवों से भरी मेरी लाडो ईश्वर तुझे सदा खुश रखे,
तेरा हर सपना पूरा हो,
मेरी ओर से समझ लेना इसे ही दिल का उपहार
आने से जिसके आए बहार जाने से जिसके जाए बहार,वह है प्यारी सन्नी,व्यक्तित्व जिसका अति दमदार
पापा की कालजे की कौर,भाई बहन की चहेती,सास ससुर की लाडली,समझदार सी मां और अर्धांगिनी,घर की केन्र्द बिंदु,कर्म ही तेरा सच्चा श्रृंगार,
दिनकर सी दमकना,इंदु सी चमकना,चित में तेरे कभी आ आए विकार
बोल मेरी सनी कर ली क्या दुआएं स्वीकार???

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