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चाहत by sneh premchand

राधा ने चाहा कान्हा को,
रुक्मणी ने पाया कान्हा को,
मीरा ने अपना प्रीतम बताया कान्हा को,
द्रौपदी ने पूर्ण समर्पण दिया कान्हा को,

सब की अपनी अपनी चाहत है
हैं सब के अपने अपने अहसास।
पर राधा का नाम आता है जेहन में
सजती है राधा ही मोहन के पास।।
       स्नेह प्रेमचंद

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