Skip to main content

सच में मां जीवन रेखा है Thought by Sneh premchand

मैने भगवान को तो नहीं देखा,
पर मां को भगवान के रूप में देखा है।
मां कुदरत की सर्वोत्तम कृति,
सच में ही मां जीवन रेखा है।।

तन हैं हम तो, रूह है मां,
दिल हैं हम तो, धड़कन है मां,
सुर हैं हम तो, सरगम है मां,
नयन हैं हम तो, चितवन है मां,
चेतना हैं हम तो, स्पंदन है मां,
सफ़र हैं हम तो, मंज़िल है मां,
एक अल्फ़ाज़ हैं हम तो,
पूरी की पूरी किताब है मां,
एक संख्या हैं हम तो,
पूरा का पूरा हिसाब है मां,
एक कतरा हैं हम तो,पूरा सागर है मां।।
प्यास हैं हम तो,पूरी गागर है मां।।।

मां को परिभाषित करना होता
गर इतना ही आसान।
तो सदियों से इसी कर्म में,
न लगा होता लेखन का जहान।।

न कोई था,न कोई है,न कोई होगा
मां से बढ़ कर कभी महान।।
एक अक्षर के छोटे से शब्द में
सिमटा हुआ है पूरा जहान।।
जब भी चलती है लेखनी मां पर,
चलती है सतत,अविलंब और अविराम।।
मां कहीं नहीं जाती,
होती है ताउम्र ज़िंदा हमारे जेहन में,
मां कुदरत का है, हमे, अनमोल वरदान।।
             स्नेह प्रेमचन्द


Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी