Skip to main content

जाग कर

**स्वयं अब जाग कर हमको जगाना देश है अपना
हकीकत में बदल जाए कथन ये,मात्र रहे ना एक सपना**

गांधी जी ने बरसों पहले बहुत सही कहा था अगर हम देश बदलना चाहते हैं तो आरंभ खुद में परिवर्तन ला कर ही करना होगा।यह परिवर्तन भी आज से और अभी से लाना होगा।यहां जागने का अर्थ है स्वयं को ज्ञानवान करना,कार्यकुशलता हासिल करना,प्रशिक्षित करना,लेटेस्ट तकनीकी ज्ञान से खुद को अपडेट रखना है।।

**जागेगा इंडिया तो आगे बढ़ेगा इंडिया**

किसी भी वतन का सबसे अनमोल खजाना उस वतन के लोग होते हैं।
इन लोगों को मात्रात्मक की जगह गुणात्मक होना अधिक जरूरी है।
सर्वप्रथम इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर ध्यान देना जरूरी होगा वतन की जागृति के लिए।।

शिक्षा  जहां जहां जलती है अलख शिक्षा की,खुद ही आ जाते हैं उजियारे
सबसे ज़रूरी है शिक्षा जागृति के लिए
हो सबका प्रथम अधिकार ये सांझ सकरे।।

Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी