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और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

और कहीं फिर क्यों हो जाना?? *Lic है खुशियों का खजाना* मानों चाहे या ना मानों, बहुत जरूरी है lic करवाना *भरोसे का धरातल सपनों का आसमान है lic* इस सत्य से रहे ना कोई अनजाना *भरोसा ही परोसा है निगम ने सदा* आता है हर सुख दुख में इसे साथ निभाना और कहीं फिर क्यों हो जाना??? *Lic है खुशियों का खजाना* *कल खेल में हम हों ना हों पर lic निभाती है सच्चा याराना* *हर धूप छांव में हर सुख दुख में संग खड़ी होती है lic  मैं भी जानूँ तू भी जाने और जाने यह सारा ज़माना* प्रॉब्लम से पहले प्लानिंग जरूरी है आग लगने के बाद कुआं खोदने मत चले जाना इसी भाव को पोषित करती यह संस्था आता है इसे जन जन के दिल में  छाना *चेक अप नहीं मेक अप की उम्र में अच्छा होता है पॉलिसी लेना* ताकि हो उज्ज्वल भविष्य और सफर कटे सुहाना और कहीं फिर क्यों हो जाना?? संस्था हमारी खुशियों का खजाना मैं रहा/रही तो जीवन की सांझ में भी आर्थिक रूप से रहूंगा/रहूँगी सक्षम,समर्थ मैं ना रहा तो मेरा परिवार नहीं टूटेगा,नहीं बिखरेगा आर्थिक रूप से,ल इस भाव से सदा मन को समझाना ज़रूरी नहीं अति जरूरी है lic पॉलिसी लेना,समय की मांग है यह सत्य बताना है...