Skip to main content

नेपथ्य by snehpremchand

एकदम से नही,पीहर धीरे धीरे ही होता है पराया।
माँ बाप के राज में होती है शीतल सी छत्रछाया।।
ज्यूँ ज्यूँ मात पिता हो जाते हैं बूढ़े,अशक्त और बीमार।
लाडो के नाज़ नखरों पर भी समझौतों की पड़ जाती है बौछार।।
जो कर देते थे नयन अयाँ,
अल्फ़ाज़ों को नही करना पड़ता था बयाँ
माँ बिन कहे ही सब समझ जाती थी,
हौले से हाथ पकड़ कमरे में ले आती थी।।
वो भी क्या दिन थे,था जब उनका सिर पर
ठंडा साया।
 एकदम से नही,पीहर धीरे धीरे ही होता है पराया।।
वो कुछ लेने नहीं आती,
उसकी खोजी सी नज़रें ढूंढती है अनमोल
से लम्हे बचपन के,अपनी गुड़िया,और वो पल,
जब मात पिता का मुख्य होता था किरदार।
उसका भी होता था एक खुद का कमरा,
अब एक कोने की भी नही रहती हकदार।।
अब वो पहले सी ज़िद्द नही करती,
मन हो या न हो,औपचारिकता भरे रिश्तों में
सहज होने का अभिनय सा करती,
फिर एक दिन जब मात पिता 
ले लेते हैं जग से विदाई।
फिर तो पीहर के नाम से ही दिल की 
चौखट पर दस्तक देने लगती है तन्हाई
फिर वो लहर,वो कसक,वो इच्छा,
जाने कहाँ ज़मीदोज़ हो जाती है।
नेपथ्य के पीछे चली जाती है बुआ,
और भतीजी आगे आ जाती है।।
            स्नेहप्रेमचंद
अयाँ---इज़हार
नेपथ्य--पर्दे के पीछे

Comments

  1. ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं,आप भी इनसे सहमत हों,ज़रूरी नहीं

    ReplyDelete
  2. आप की प्रतिक्रिया मेरे लिए प्रेरणा का कार्य करेगी

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी